दिल्ली मंत्रिमंडल में फेरबदल, मनीष सिसोदिया को पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया है। दो विभागों को लेकर मंत्रियों के दायित्व में बदलाव किया गया है। पर्यटन विभाग राजेंद्र पाल गौतम से लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिया गया है। राजस्व विभाग मनीष सिसोदिया से लेकर मंत्री कैलाश गहलोत को दिया गया है। बुधवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल से सहमति मिलने के बाद यह प्रक्रिया पूरी हुई। सरकार बृहस्पतिवार को अधिसूचना जारी करेगी। सूत्रों के मुताबिक इस बदलाव के पीछे आप सरकार की बड़ी रणनीति है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन के बाद अब पर्यटन विभाग भी प्रमुख विभागों में शामिल होगा। पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी योजनाएं धरातल पर आ सकती हैं। इसके चलते ही उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पर्यटन विभाग की कमान खुद संभाली है। राजस्व विभाग मंत्री कैलाश गहलोत को देकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को तेज करना चाहती है। मौजूदा समय में राजस्व विभाग कई योजनाओं पर काम कर रहा है। इस विभाग का कामकाज कानून विभाग से भी जुड़ा है और यह विभाग कैलाश गहलोत के पास ही है। लाल डोरा, जमीन का अधिग्रहण समेत कई ऐसे मुद्दे हैं, जो राजस्व विभाग के अधीन आते हैं। एक ही मंत्री के पास दोनों विभागों की जिम्मेदारी होने से बेहतर समन्वय स्थापित होगा। रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटी (आरसीएस) की जिम्मेदारी मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को दी गई है। अभी राजेंद्र जल बोर्ड व कई विभाग देख रहे हैं। सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण कार्य भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। कॉफी होम्स को लेकर योजना पर काम चल रहा है। इन दोनों योजनाओं को अब उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया देखेंगे।

मायावती ने दोबारा लिखकर दिया इस्तीफा, राज्यसभा चेयरमैन ने किया मंजूर

नई दिल्ली दलितों के मुद्दे पर राज्यसभा में बोलने न देने नाराज होकर इस्तीफा देने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. हालांकि राज्यसभा के चेयरमैन को उन्हें दोबारा सही फॉर्मेट में अपना इस्तीफा लिखकर देना पड़ा. राज्यसभा के चेयरमैन ने मायावती का पहला इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था और उनसे सदन में लौटने को कहा था, लेकिन मायावती ने लौटने के बजाय दोबारा इस्तीफा लिखकर देना बेहतर समझा. इससे पहले कांग्रेस और अन्य दलों ने मायावती से अपने इस्तीफे पर पुर्नविचार करने को कहा था.बता दें कि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने 18 जुलाई को राज्यसभा में सहारनपुर में दलित विरोधी हिंसा के मुद्दे पर आसन द्वारा उनको पूरी बात कहने की अनुमति नहीं दिये जाने के कुछ ही घंटों बाद उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. मायावती ने सोमवार शाम को राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से मिलकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंप दिया. हालांकि मायावती का ये इस्तीफा राज्यसभा सचिवालय ने मंजूर नहीं किया. इस्तीफे के सही प्रारूप के अनुसार त्यागपत्र संक्षिप्त होना चाहिए और इसमें कारणों का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए. 18 जुलाई के घटनाक्रम के मुताबिक जब राज्यसभा में मायावती ने बोलना शुरू किया तो उन्हें उपसभापति पी जे कुरियन ने नियमों के तहत बोलने को कहा. इससे नाखुश बसपा प्रमुख ने कहा, 'मैं आज राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगी. मायावती का राज्यसभा में वर्तमान कार्यकाल अगले वर्ष अप्रैल में समाप्त होने वाला था.' मीडिया में वितरित उनके इस्तीफे में मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि उन्हें दलितों के मुद्दे पर उच्च सदन में बोलने नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, 'जैसे ही मैंने अपनी बात सदन के समक्ष रखनी शुरू की, सत्ता पक्ष की ओर से उनके संसद सदस्यों के साथ मंत्री गण भी खड़े हो गये और अवरोध उत्पन्न करने लगे.'

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