कैट 2018 की परीक्षा की तैयारी कैसे करें

हर साल लाखों छात्र स्नातक की परीक्षा पास करते हैं। इनमें से अनेकों छात्रों का सपना होता है कि वे कॉर्पोरेट जगत के साथ जुड़कर अपना करियर बनाएं और बड़े पदों पर आसीन होकर खूब पैसा कमाएं। इस सपना को पूरा करने के लिए मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एम.बी.ए.) एक आकर्षक विकल्प है। हालांकि एम.बी.ए. कोर्स कई संस्थानों द्वारा कराया जाता है लेकिन भारत में आई.आई.एम. द्वारा आयोजित कैट परीक्षा का सबसे अधिक महत्व है। कैट की परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। इसलिए छात्रों के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना आसान नहीं होता है। परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को लगातार कठिन अध्ययन की जरूरत होती है। परिक्षार्थी किस तरह कैट की तैयारी करें और परीक्षा में पूर्णत: सफल होकर अपना उज्ज्वल भविष्य बनाएं। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है। कैट क्या है? कैट अर्थात कॉमन एडमिशन टेस्ट। यह एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा है। प्रत्येक वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। यह परीक्षा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आई.आई.एम.) द्वारा आयोजित की जाती है। कैट के द्वारा छात्र व्यवसाय प्रशासन कार्यक्रम की पढ़ाई करते हैं और इस क्षेत्र में अपना करियर बनाते हैं। इस परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र सीमा निर्धारित नहीं होती है। आई.आई.एम. क्या है? आई.आई.एम. का पूरा नाम भारतीय प्रबंधन संस्थान है। आई.आई.एम. द्वारा एम.बी.ए. कार्यक्रमों के लिए छात्रों के चयन हेतु प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है जिसे कैट कहते हैं। कैट द्वारा प्रदत स्कोर को सिर्फ आई.आई.एम. ही नहीं बल्कि कई अन्य प्रबंधन स्कूलों द्वारा मान्यता दिया जाता है। कैट की तैयारी के लिए कितना समय पर्याप्त होता है? विशेषज्ञों और योग्य छात्रों का दावा है यदि छात्र स्मार्ट और लक्ष्य को साधते हुए अध्ययन करे तो कैट परीक्षा की तैयारी के लिए छह महीने का समय पर्याप्त होता है। इस परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए अभ्यर्थियों को पर्याप्त स्कोर लाना आवश्यक है। पर्याप्त स्कोर का अर्थ यह नहीं है कि आप सभी सवालों के जवाब दें। आपको अपने चयन के लिए कोशिश करनी चाहिए कि अधिक से अधिक सवालों के जवाब दें और सभी उत्तर सही हों। पिछले कुछ सालों में शीर्ष स्थान पाने वाले कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने केवल छह महीने की अवधि में रोजाना 2-3 घंटे का अध्ययन करके परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके लिए आपको परीक्षा पैटर्न की जानकारी होनी आवश्यक है। कैट की परीक्षा के लिए स्नातक में कितना नंबर होना चाहिए? वे सभी विद्यार्थी जो स्नातक में 50प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण हुए है, वे इस प्रवेश परीक्षा में भाग ले सकते है। कैट एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा है जिसमें 100 प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के होते हैं। एक सवाल के लिए 4 अंक निर्धारित होते हैं। इन सभी प्रश्नों को हल करने के लिए आपको 3 घण्टे का समय दिया जाता है। सभी प्रश्न एम.सी.क्यू. पैटर्न में पूछे जाते हैं। आपको जिस सवाल की पूरी जानकारी है आप उसी का जवाब दें क्योंकि 4 सवालों के गलत जवाब देने पर आपका एक अंक काट लिया जाता है। परीक्षा में निम्न तीन भागों से प्रश्न पूछे जाते हैं- 1. क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड - 28 अंक 2.वर्बल एंड रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन - 44 अंक 3.डाटा इंटरप्रिटेशन एंड लॉजिकल रीजनिंग- 28 अंक कैट 2018 के लिए कब से शुरू करें तैयारी? साल 2017 को आधार माना जाए तो इस वर्ष भी कैट परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है और परीक्षा दिसंबर में आयोजित की जा सकती है। इस हिसाब से परिक्षार्थियों के पास अभी से करीब छह महीने का समय बचता है। जो अभ्यर्थी इस साल परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं उनके लिए इतना समय पर्याप्त है। इसलिए आपको अपनी तैयारी अभी से ही शुरू करनी चाहिए और मन लगाकर पढऩा चाहिए। किसी भी परीक्षा को पास करने के लिए सबसे पहले छात्रों को उस परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों से संबंधित पाठ्यक्रम की जानकारी जरूर होनी चाहिए। कैट परीक्षा में जिस तरह के सवाल पूछे जाते हैं उनकी अधिक जानकारी पाने की कोशिश करें। आपको इसके लिए पिछले कुछ वर्षों में हुए कैट के प्रश्न पत्र का अध्ययन करना चाहिए। इसके साथ ही आप इंटरनेट की सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं। कैट की तैयारी के लिए बाजार में उपलब्ध किसी अच्छे प्रकाशन की पुस्तक खरीदें। आपके घर या आस-पास कोई छात्र अथवा किसी कोचिंग संस्थान से सहायता प्राप्त करें जो कैट से संबंधित तैयारी में आपकी मदद कर सके या आपके सवालों को हल कर सके। आप रोजाना कम से कम 3 घंटे अध्ययन जरूर करें। रोजाना नियमित रूप से अखबार पढ़ें और न्यूज़ देखें। इससे आपको नवीनतम जानकारी मिलती रहेगी। कैट ऐसी परीक्षा है जिसको पास करने के लिए आपको समय प्रबंधन की जानकारी होना जरूरी है। परीक्षा में कई तरह के प्रश्न होते हैं इन प्रश्नों में से सबसे पहले उनको हल करें जिनको आप अच्छी तरह हल कर सकते हैं। जितने सवालों के जवाब आप जानते हैं उन सभी के जवाब देने के बाद उन प्रश्नों को हल करें जिनमें आपको अधिक समय लगने वाला है। इससे आपका कीमती समय व्यर्थ नहीं जाएगा। परीक्षा में बहुत से विषयों से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए प्रत्येक विषय को बराबर समय दें। मस्तिष्क पर अधिक दवाब न डालें। छात्रों में यह आदत बहुत देखी जाती है कि जब परीक्षा के कुछ दिन बचते हंि तो वे और भी अधिक समय तक अध्ययन करने लगते हैं। यह हमेशा सही नहीं होता। इस जैसे बड़े स्तर की परीक्षा के लिए आपका मस्तिष्क शांत होना चाहिए। जब परीक्षा के दिन नजदीक आ जाए तो आप नई चीजों को याद करने की जगह पुरानी याद की हुई चीजों का रिवीजन करें। परीक्षा के दौरान न हों हतोत्साहित प्राय: परीक्षार्थी परीक्षा के समय हतोत्साहित होने लगते हैं लेकिन यदि आप घबराएंगे तो अपने लक्ष्य को नहीं पा सकेंगे। अपनी तैयारी पर ध्यान दें और पूरी दिमागी शक्ति लगातर परीक्षा दें। परीक्षा देने जाते समय प्रवेश पत्र, पेंसिल, पैन आदि को अपने साथ जरूर रखें। यदि आप उपरोक्त बातों का ध्यान रखेंगे तो निश्चय ही कैट की परीक्षा पास कर लेंगे और अपने मनचाहे क्षेत्र में अपना भविष्य संवार सकेंगे। दिव्या आनंद

बिना तथ्यों की पड़ताल किए होने लगीं 'बीफ पार्टियां

अरुण आनंद मांस के लिए मवेशियों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना को लेकर हाल ही में विवाद पैदा हो गया है। कुछ जगह इसके विरोध में बीफ पार्टियों का भी आयोजन किया गया। विपक्ष ने भी इस अधिसूचना का विरोध किया। मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर कुछ दिन के लिए स्टे भी लगा दिया है।वास्तव में यह अधिसूचना मवेशियों की तस्करी को रोकने की मंशा से की गई थी। मवेशियों की तस्करी का एक पूरा उद्योग है जिसने देशभर में पांव पसार रखे हैं और बड़ी तेजी से फैल रहा है। लाखों की संख्या में मवेशियों को तस्करों द्वारा सीमा पार कर बांग्लादेश ले जाया जाता है जहां उनका अंत बूचडख़ानों में होता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्थाई संसदीय समिति ने अप्रैल 2017 में अंतरराष्ट्रीय सीमा से संबंधित जो रिपोर्ट संसद में पेश की उसमें इस समस्या के बारे में विस्तार से चर्चा की है और चिंता भी जाहिर की गई है। समिति ने सरकार को सिफारिश की है कि तस्करी के इस पूरे तंत्र पर कुठाराघात करने के लिए सरकार को कड़े और व्यापक कदम उठाने की जरूरत है। इस संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को देखा जाए तो इस कदम की प्रासंगिकता स्पष्ट होती है। दिलचस्प बात यह है कि इस समिति का अध्यक्ष कोई और नहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम हैं। यह बात दीगर है कि उनकी अपनी पार्टी भी इस अधिसूचना का विरोध कर रही है। मवेशियों की तस्करी से जुड़े तथ्यों पर नजऱ डालें तो उनके संदर्भ में इस विवाद को समझने का प्रयास करें। स्थायी समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस तस्करी को बढ़ावा देने में तीन महत्वपूर्ण कारक हैं— 1. बांग्लादेश के साथ लगी अंतररष्ट्रीय सीमा के निकट 300 गांवों की मौजूदगी और सघन जनसंख्या वाले इलाके। 2. सीमा सुरक्षा बल यानी कि बीएसएफ द्वारा जिन मवेशियों को जब्त कर लिया जाता है उनकी नीलामी की जाती है लेकिन नीलामी के तंत्र को इस तरह से नियंत्रित किया जा रहा है कि यह मवेशी फिर उन्हीं तस्करों के पास पहुंच जाते हैं। 3. सीमा के निकट कुछ स्थानीय लोग तस्करी के इस तंत्र में बड़ी मजबूती से स्थापित हैं और तस्करी में भागीदार हैं। विडंबना यह है कि अभी तक अधिकृत तौर पर हमारे पास कोई ऐसा आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है जो तस्करी के शिकार कुल पशुओं की संख्या का अंदाजा दे सके लेकिन सीमा सुरक्षा बल के पास तस्करों से जब्त किए गए मवेशियों का आंकड़ा इस समस्या की विकरालता और गंभीरता की ओर इशारा करता है। वर्ष 2012 में 1,20,724 मवेशी जब्त हुए, 2013 में यह संख्या 1,22,000, 2014 में 1,09,999, 2015 में 1,53,602 और 2016 में अक्टूबर माह तक 1,46,967 मवेशी तस्करों के शिकंजे से छुड़ाए गए।स्थाई समिति की रिपोर्ट के अनुसार इन तस्करों का जाल हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। इन इलाकों से स्थानीय एजेंट इन पशुओं को अवैध ढंग से पश्चिम बंगाल तथा असम पहुंचाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार असम में धुबरी तथा पश्चिम बंगाल में नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, रायगंज व सिलिगुड़ी इस तस्करी के मुख्य केंद्र हैं। संसदीय समिति ने इस बात पर रोष जाहिर किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार 1 सितंबर 2003 को अपने ही द्वारा जारी एक अधिसूचना का उल्लंघन कर रही है। इस अधिसूचना के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सीमा के आठ किलोमीटर के दायरे में कोई पशु हाट नहीं होना चाहिए लेकिन स्वयं पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने इस समिति को बताया कि ऐसे 15 हाट चल रहे हैं जिसमें से मुर्शिदाबाद के हाट को ही अभी तक स्थानांतरित किया गया है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की सरकार द्वारा केंद्र सरकार की इस अधिसूचना का विरोध इस बात का संकेत है कि न तो राज्य सरकार खुद कानून का पालन कर रही है और न यह चाहती है कि इस संबंध में कोई और काननू बने। इसका लाभ किसे मिलेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं हैं। बीएसएफ ने अपने आकलन में साफ कहा है कि हन हाटों की मौजूदगी पशुओं की तस्करी को बढ़ावा देती है क्योंकि हाटों तक मवेशियों आदि को ले जाने पर कोई अंकुश नहीं है। इसी की आड़ में खुलकर तस्करी हो रही है। ऐसे में क्यों राज्य सरकार इन हाटों को बंद नहीं कर रही है, इस सवाल को उठाया जाना चाहिए। जब राज्य सरकार खुद अपने ही नियमों का उल्लंघन करने लगेगी तो मवेशियों की तस्करी को कौन रोकेगा?समिति ने इस बात की सिफारिश की है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सीमा के निकट नियमों के विरुद्ध बने इन हाटों के लाइसेंस फौरन रद्द करने चाहिए। इस संबंध में राज्य सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। समिति ने एक कदम और आगे जाकर सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी पशु हाटों को हटाने की सिफारिश की है। एक अन्य सिफारिश में समिति ने कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सीमा के निकट उन स्थानीय लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो इस तस्करी में लिप्त हैं या इसे बढ़ावा दे रहे हैं। समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा कि तस्करी का यह तंत्र बड़ा व्यापक और मजबूत है और इसे तोडऩे के लिए इसके मूल में प्रहार करने की जरूरत है। संभवत: केंद्र सरकार की मंशा इसी प्रकार का प्रहार करने की थी लेकिन इस विवाद को राजनीतिक रंग देकर विपक्षी दलों ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे को अपने तार्किक अंत तक पहुंचने से फिलहाल तो रोक दिया है। उस पर देश के कई हिस्सो में 'बीफÓ पार्टियों का आयोजन इस बात का संकेत देता है कि किस तरह बिना तथ्यों की पड़ताल किए हमारे समाज का एक 'एलीटÓ वर्ग जो खुद को 'उदारवादीÓ कहता है निरीह पशुओं के जीवन के प्रति असंवेदनशील है और शायद उसे मवेशियों की तस्करी रोकने में कोई खास रुचि नहीं है। (ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं)

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