अरुणाचल: फ्लोर टेस्ट के पहले नबाम तुकी का इस्तीफा, पेमा खांडू बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री

सीएम नबाम टुकी ने दिया इस्‍तीफा, पेमा खांडु होंगे नए नेता
कांग्रेस ने तोड़ा बीजेपी का 'पुल', चला ये दांव
इटानगर अरुणाचल प्रदेश में शनिवार को फ्लोर टेस्ट के पहले मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने राज्यपाल को इस्तीफा दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तुकी को आज दोपहर 1 बजे विधानसभा में बहुमत साबित करना था. उनके इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस के पेमा खांडू अरुणाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं. खांडू को 44 विधायकों ने समर्थन दिया है.इस्तीफा देते हुए नबाम तुकी ने कहा कि अब राज्य को युवा नेतृत्व की जरूरत है. इसके पहले उन्होंने सुबह 9 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई. जिसमें कांग्रेस विधायक दल का नया नेता चुना गया.अरुणाचल प्रदेश में आज का दिन राजनीतिक गहमागहमी का है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अरुणाचल में कांग्रेस के बागी कालिखो पुल की सरकार हटने के बाद आज दोपहर वहां बहुमत परीक्षण होना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से बहाल हुए मुख्यमंत्री नबाम तुकी को बहुमत साबित करना है।
कांग्रेस ने सियासी दांव चलते हुए नई रणनीति बनाई है। पूर्व सीएम पेमा खांडू को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया है। नबाम तुकी ने इस्तीफा दे दिया है। यानि अगर बहुमत साबित होता है तो खांडू नए सीएम होंगे। आज कांग्रेस विधायक दल की बैठक में करीब 40 विधायक मौजूद थे। बहुमत के लिए 31 विधायकों की जरूरत है। नया नेता चुने जाने के बाद नबाम तुकी गर्वनर से मिलने राजभवन पहुंचे। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को लेकर पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई थी. कांग्रेस के 20 बागी विधायकों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी यदि नेतृत्व बदलती है, तो वो पार्टी में वापस लौट सकते हैं. बीजेपी सूत्रों की मानें, फ्लोर टेस्ट के दौरान स्पीकर रेबिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक, यदि बीजेपी और पुल रेबिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो उन्हें खुद का भी वोट साबित करना होगा.
इससे पहले नबाम तुकी ने राज्यपाल से बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था, लेकिन शुक्रवार को राज्यपाल तथागत राय ने तुकी को शनिवार को ही बहुमत साबित करने के लिए कहा है. वहीं अब अगले कदम के लिए कांग्रेस कानूनी सलाह भी ले रही है.इस बीच बीजेपी ने पूछा कि आखिर तुकी और समय क्यों मांग रहे हैं? नवाम तुकी और विधानसभा स्पीकर ने भी कहा कि शनिवार को विधानसभा का सत्र बुलाने में कई दिक्कतें हैं. लेकिन राज्यपाल को ये दलीलें रास नहीं आईं. 60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में कांग्रेस के 15 विधायक हैं जबकि कलिखो पुल अपने समर्थन में 43 विधायकों का दावा करते हैं, बाकी दो सीट खाली हैं. अब नजरें इस बात पर टिकी है कि स्पीकर क्या करते हैं. बीजेपी ने भी अपनी पूरी ताकत लगा रखी है. अरुणाचल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बनी सरकार को विधानसभा के फ्लोर पर पटखनी देकर एक फिर से कलिखो पुल के नेतृव में एनडीए की सरकार बना कर पीएम मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में जल्दी से एक कदम और आगे बढ़ा जाए. अरुणाचल प्रदेश की राजनीतिक उठापटक में अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं हुई है. कांग्रेस अगर बहुमत नहीं जुटा पाई तो उसके सीएम को इस्तीफा देना होगा और कलिखो पुल फिर सीएम बन सकते हैं. यानी घड़ी की सुइयां 17 दिसंबर से घूम कर फिर 19 फरवरी तक पहुंच सकती हैं. लेकिन राज्य का इतिहास बताता है कि आखिरी वक्त तक कुछ भी हो सकता है.

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