असम में बाढ़ का कहर, काजीरंगा पार्क में अब तक 140 जानवरों की मौत

असम में बाढ़ के कहर ने जनजीवन पूरी तरह से बाधित हो चुका है। वहीं काजीरंगा नेशनल पार्क का लगभग 80 फीसदी हिस्सा जलमग्न हो चुका है। दावा है कि बाढ़ के कारण अब तक 140 जानवरों की मौत हो चुकी है। मृत जानवरों में सात गैंडे भी शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क की डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर रोहिणी बल्लाब सैकिया ने बताया कि 10 अगस्त तक सात गैंडे, 122 हिरण, दो हांथी, तीन जंगली सुअर, दो हॉग हिरण, तीन सांबर हिरण, एक भैंस और एक साही की मौत हो चुकी है। बता दें कि पूर्वोत्तर में बाढ़ से 58 जिलों को प्रभावित किया है जिनमें अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में ब्रह्मपुत्र और इसकी उपनदियां बाढ़ के खतरे के निशान के ऊपर बहने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच राज्य के काजीरंगा नेशनल पार्क में पशुओं के हताहत होने की संख्या बढ़कर 140 पहुंच चुकी है। गौरतलब है कि मामले में काजीरंगा डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर रोहिणी बल्लाब सैकिया ने पहले कहा था कि बाढ़ की हालात में कुछ सुधार हुआ है। उस वक्त पार्क क्षेत्र में 50% जल स्तर नीचे पहुंच चुका था, जिस वजह से मरे जानवरों के शव सामने आ रहे थे।

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में बड़ा फैसला, आम जरूरत की 177 चीजें हुईं सस्ती

गुवाहाटी, गुवाहाटी में चल रही GST काउंसिल की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं. शुक्रवार को हुई इस बैठक में फैसला हुआ है कि अब 28% स्लैब में कुल 50 ही प्रोडक्ट रहेंगे. पहले 28 फीसदी स्लैब में कुल 227 वस्तुएं थीं. जीएसटी काउंसिल ने शेविंग क्रीम, टूथपेस्ट, शैंपू, चॉकलेट, मार्बल आदि को 28 फीसदी टैक्स की स्लैब से हटा दिया है. अब सिर्फ 50 लग्जरी प्रोडक्ट ही 28 फीसदी की श्रेणी में रहेंगे. गौरतलब है कि ​परिषद की दो दिवसीय बैठक गुरुवार को शुरू हुई थी. परिषद की यह 23वीं बैठक है. इसमें असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह की एकमुश्त योजना के लिए कर दरों में कटौती के सुझावों पर भी विचार किया गया. जेटली की अध्यक्षता वाली इस परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं. देश में जुलाई 2017 से कार्यान्वित जीएसटी के तहत 1200 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत कर की श्रेणी में लाया गया है. विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के कर निर्धारण का आधार पिछले कराधार को बनाया गया है. यानी सभी वस्तुओं और सेवाओं पर कर के भार को लगभग पूर्व के स्तर पर बरकरार रखने के साथ राजस्व संग्रह तटस्थ रखने का प्रयास किया गया है. जेटली ने पिछले दिनों कहा था कि कुछ वस्तुओं पर 28 प्रतिशत कर की दर नहीं होनी चाहिए और पिछले तीन-चार बैठकों में जीएसटी परिषद ने 100 वस्तुओं पर जीएसटी की दर में कमी की है. इसके तहत कर की दर को 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत और 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत की दर पर लाया गया है. जेटली ने कहा था, "हम धीरे-धीरे कर की दर को नीचे ला रहे हैं. इसके पीछे विचार यह है कि जैसे आपका राजस्व संग्रह तटस्थ होता है हमें इसमें कमी (उच्च कर दायरे में आने वाली वस्तुओं की संख्या) लानी चाहिए और परिषद अब तक इसी रूप से काम कर रही है." यहां आपको यह भी बता दें कि जीएसटी के पहले तीन महीने में सरकारी खजाने को कुल मिलाकर 2.78 लाख करोड़ रुपये का संग्रहण आया है.

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