गोवा: पर्रिकर बने सीएम तो मिलेगा दूसरों का समर्थन, कांग्रेस ने लगाया हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप

पणजी। गोवा विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। भाजपा को एंटी इनकंबेंसी का खामियाजा भुगतान पड़ा और पार्टी यहां केवल 13 सीटें ही मिल पाई हैं। वहीं कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 40 में से 17 सीटें जीत ली हैं। नतीजों के बाद जहां कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा ठोंक दिया है वहीं भाजपा भी सरकार बनाने की बात कह रही है। खबर यह भी है कि अगर भाजपा पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाती है तो अन्य दलों ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए समर्थन का भरोसा दे दिया है। इस बीच कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि क्या यही वो पार्टी है जो नैतिकता की बात करती है? वो हार चुके हैं और हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं। मंत्री बनाने का ऐसा वादा कर रहे हैं जैसे मिठाई बांट रहे हों। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि अगर आपके पास 21 से ज्यादा विधायक हैं, हम विपक्ष में बैठने को तैयार हैं लेकिन यह जनादेश की विरोध है। कांग्रेस के दावे को लेकर कहा कि हम गैरभाजपा विधायकों से संपर्क में हैं और हमारे पास समर्थन है। बता दें कि कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से कांग्रेस अब भी चार सीट पीछे है लेकिन कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने सरकार बनाने का दावा ठोंक दिया है। दिग्विजय गोवा कांग्रेस के प्रभारी हैं। जबकि भाजपा खेमे से खबर है कि गोवा के पर्यवेक्षक बनाए गए नितिन गडकरी वहां पहुंच चुके हैं। दावा है कि पार्टी सरकार बनाने में कायमाब रहेगी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाकर दोबारा गोवा भेजा जाएगा।यह देखना रोचक होगा कि तीन निर्दलीय समेत अन्य दल किसके साथ जाकर सरकार बनाने में मदद करते हैं। ये दल हैं- राकांपा एक सीट, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी तीन सीट और गोवा फॉरवर्ड पार्टी तीन सीट।

अमेरिकी रक्षा मंत्री का भारत के साथ सैन्य प्रौद्योगिकी तालमेल पर जोर

पणजी अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा है कि भारत और अमेरिका को अपनी ऐसी सैन्य प्रौद्योगिकियों में तालमेल बिठाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, जिनका विकास उन्होंने अलग-अलग किया है। मोरमुगाव पोर्ट ट्रस्ट (एमपीटी) पर ठहरे अमेरिकी पोत यूएसएस ब्लू रिज पर क्रू को संबोधित करते हुए कार्टर ने कहा,‘हमारे पास भारत-अमेरिकी रिश्तों पर काम करने की वजह ऐतिहासिक है। आप याद करें कि भारत का जन्म सात दशक पहले हुआ था और उसकी नीति अमेरिका से जुड़ने वाली नहीं थी।’ कार्टर ने कहा,‘इसका मतलब यह है कि हमारी सेनाएं अलग-अलग विकसित हुईं, हमारी प्रौद्योगिकी प्रणालियां अलग-अलग विकसित हुईं और अब जब हमें उनके साथ मिलकर काम करना है, तो तालमेल बिठाने के लिए कोशिशें करनी होगी । हमें इस पर काम करना होगा। इसलिए मैं यहां हूं, इसलिए आप यहां हैं।’ कार्टर और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार (11 अप्रैल) पोत का दौरा किया था। यह पोत सोमवार मुंबई से यहां पहुंचा था। भारत के साथ तालमेल बिठाने के अमेरिका के तौर-तरीकों के बाबत कार्टर ने कहा,‘यहां एक देश है। एक अरब लोगों का लोकतंत्र, जहां अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं और सभी का सम्मान होता है।’ उन्होंने कहा,‘यहां एक नागरिक समाज है जहां लोग खुलकर चर्चा और वाद-विवाद करते हैं। भारत में कानून का शासन महत्वपूर्ण है।’ यूएसएस ब्लू रिज पर सवार क्रू की ओर इशारा करते हुए कार्टर ने कहा,‘आप सामरिक अंत:क्रिया की हमारी शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप हर किसी के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए दूसरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आज यही अमेरिकी रुख है। यह लोगों को हटाने के लिए नहीं है। अमेरिकी शैली सरजमीं की हिफाजत के लिए हमेशा से दूसरों को जोड़ने वाली रही है। इसलिए लोग हमारे साथ काम करना पसंद करते हैं।’

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