गुजरात: हिरासत में हार्दिक, सूरत में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध

सूरत/अहमदाबाद/नवसारी,    गुजरात के सूरत शहर में आज पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक हार्दिक पटेल और उनके समर्थकों को हिरासत में लिये जाने के बाद पूरे जिले में दोपहर 12 बजे से 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने बताया कि यह कदम सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर लगाम कसने के लिए उठाया गया है।
गौरतलब है कि गुजरात में राजनीतिक रूप में मजबूत पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के संयोजक हार्दिक पटेल तथा उनके लगभग 35 समर्थकों को आज सूरत में बिना प्रशासनिक मंजूरी के एकता यात्रा निकालने के आरोप में आज पुलिस ने मानगढ़ चौक के निकट हिरासत मे ले लिया। इसके विरोध में शहर के हीराबाग विस्तार से एक अन्य एकता यात्रा निकाल रहे पास के सह संयोजक निखिल सवाणी और उनके कुछ समर्थकों को भी बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
उधर हार्दिक को हिरासत में लिये जाने के मद्देनजर दांडी के आसपास के 90 गांवों के ग्रामीणों के साथ उनके खिलाफ निकलने वाली ओबीसी एकता मंच समर्थित प्रतिकार यात्रा नहीं निकाली गयी। मंच के संयोजक अल्पेश ठाकोर ने कहा कि अगर पास की यात्रा निकलती, तो वे काले झंडो के साथ अपनी प्रतिकार यात्रा निकालते, पर अब इसका कोई मतलब नहीं रहा। दोनो ही यात्राओं को प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिली थी।
सूरत के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने बताया कि शांति भंग होने की आशंका को टालने के लिए यह कदम उठाया गया है। हार्दिक को केवल एहतियाती हिरासत में लिया गया है, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। समझा जाता है कि हार्दिक के साथ पकडे गये लोगों में पास के सूरत कन्वीनर अल्पेश कथिरिया तथा उनके करीबी दिनेश पटेल और चिराग पटेल भी शामिल हैं।
दांडी से प्रस्तावित उनकी आज की एकता यात्रा को नवसारी जिला प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी थी, जिसके बाद आज उन्होंने बहुत गुपचुप ढंग से अंतिम क्षणों में करीब नौ बजे सूरत के वाराछा विस्तार के मानगढ़ चौक से इसे शुरू करने का प्रयास किया था। उन्होंने वहां बनी सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया था। पहले इसे कामरेज चौकडी से शुरू किया जाना था।
हार्दिक की बहुचर्चित दांडी से अहमदाबाद के साबरमती आश्रम तक की दो बार की नामंजूरी के बाद नवसारी जिला प्रशासन ने आज तड़के एक नये नाम एकता यात्रा के साथ प्रस्तावित करीब 350 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को अनुमति देने से कल रात एक बार फिर इंकार कर दिया, जबकि संगठन ने हर हाल में इसे निकालने का अल्टीमेटम दिया था।
नवसारी की जिला कलेक्टर रम्या मोहन ने कहा था कि पास की एकता यात्रा तथा इसके  विरोध में दांडी के आसपास के 90 गांवों और ओबीसी एकता मंच की प्रतिकार रैली को भी मंजूरी नहीं दी गयी। बिना अनुमति के इस तरह की यात्रा निकाली  जाएगी तो ऐसा करने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा।
उधर पास संयोजक हार्दिक पटेल ने दावा किया था कि यात्रा हर हाल में निकलेगी, हालांकि इसमें कोई नया मोड हो सकता है। उनके करीबी चिराग पटेल तथा सूरत में संगठन के संयोजक अल्पेश कथिरिया ने भी कहा कि मंजूरी नहीं होने पर भी यात्रा निकाल जाएगी। उन्होंने कहा कि वह किसी भी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है और कानून भी तोड़ना नहीं चाहते, पर प्रशासन बार बार इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए मंजूरी नहीं देकर उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर रहा है।
पूर्व में प्रशासन ने गत छह सितंबर के लिए भी इस मार्च को अनुमति नहीं दी थी। आसपास के 70 गांवों के प्रतिकार मार्च को भी मंजूरी नहीं दी गयी थी। इस बार इनकी संख्या बढ़ कर 90 हो गयी है तथा इसे ओबीसी एकता मंच के अल्पेश ठाकोर का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने पास की यात्रा निकलने पर अपनी भी रैली हर हाल में निकालने की बात कही थी।
हार्दिक पटेल की उलट दांडी यात्रा (अब एकता यात्रा) जो लगभग 85 वर्ष पहले ब्रिटिशकालीन दमनकारी नमक कानून को तोड़ने के लिए महात्मा गांधी की साबरमती आश्रम से दांडी तक की ऐतिहासिक यात्रा मार्ग के ठीक उलटे रास्ते से प्रस्तावित है, की घोषणा हार्दिक ने सूरत में पहली बार गत एक सितंबर को की थी।
पास के आंदोलन को गैर गांधीवादी और हिंसात्मक करार देते हुए इसके खिलाफ में तब आसपास के 33 गांवों के प्रतिकार मार्च अथवा रैली को भी मंजूरी नहीं मिली थी। मंजूरी नहीं मिलने के बाद हार्दिक ने चेतावनी दी थी कि 13  सितंबर को वह हर हाल में यह कार्यक्रम शुरू करेंगे। पर आखिरी मौके पर वित्त मंत्री सौरभ पटेल की पहल पर इसे टाल दिया गया था। इसके बाद हार्दिक और उनकी टीम की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल से मुलाकात हुई थी और उसके ठीक बाद उन्होंने 19 सितंबर को एकता यात्रा के नये नाम से इस यात्रा को शुरू करने की घोषणा की थी।
पटेल समुदाय को अन्य  छडा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने की मांग कर रहे पास की गत 25 अगस्त की अहमदाबाद की रैली के बाद हार्दिक की गिरफ्तारी के कुछ ही समय के भीतर राज्यव्यापी हिंसा फैल गयी थी। दो दिनों की हिंसा के दौरान दस लोग मारे गये थे तथा 200 से अधिक वाहन जला दिये गये थे।

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