हरियाणा के पलवल में ट्रेन हादसा; 2 ट्रेनें आपस में टकराईं

 ड्राइवर की मौत, 100 लोग घायल
पलवल: हरियाणा के पलवल के पास आज कोहरे के बीच एक लोकल ट्रेन लोकमान्य तिलक हरिद्वार एक्सप्रेस से टकरा गई जिससे एक ट्रेन के चालक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए ।
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता नीरज शर्मा ने बताया कि हादसे में पलवल-गाजियाबाद ईएमयू के चालक की मौत हो गई तथा ट्रेन का सहचालक और एक्सप्रेस ट्रेन का गार्ड घायल हो गया । उन्होंने कहा, ‘आज सुबह कोहरा था और ईएमयू का चालक संभवत: सिग्नल नहीं देख पाया और ट्रेन में पीछे से टक्कर मार दी ।’ शर्मा ने कहा कि आगे के ब्योरे की प्रतीक्षा है ।
हादसे की वजह से कम से कम 15 ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हुआ है । उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एके पुठिया वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और स्थिति को देख रहे हैं । रेलवे प्रवक्ता ने कहा कि दोनों ट्रेनों के यात्री सुरक्षित हैं

भगाना कांड के 100 पीड़ित परिवारों ने कबूला इस्लाम


जंतर मंतर पर कबूला इस्लाम
हरियाणा के 100 परिवार के लोगों ने शनिवार को सामूहिक रूप से इस्लाम कबूल कर लिया। इन्होंने बाकायदा जंतर मंतर पर कलमा और नमाज पढ़ी। मोहम्मद आलिल रहमान ने इनका धर्म परिवर्तन करवाया। ये सभी लोग हिसार के भगाणा गांव के हैं। सभी लोग गांव छोड़ने के बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे थे।
वह न्याय के लिए पिछले दो सालों से तकरीबन सभी सरकारी दफ्तरों व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ, क्योंकि वह दलित व पिछड़ी जातियों से हैं।
'जाति के नाम पर हुआ अत्याचार'
उनका आरोप है कि गांव की पंचायत ने उनका बहिष्कार किया। उनकी जमीनों पर भी कब्जा कर लिया। शिकायत करने पर मारपीट और गोलीबारी की गई। महिलाओं के साथ भी बदसलूकी हुई। इसकी शिकायत हर जगह और तकरीबन हर अधिकारी से कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। धर्म परिवर्तन करने वाले सतीश काजला ने बताया कि हरियाणा में उन पर जाति के नाम पर अत्याचार व अन्याय हुआ। अत्याचार करने वाले सवर्ण जातियों से हैं। पुलिस व सरकारी अधिकारी भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करते, क्योंकि वह भी उन्हीं जातियों से हैं।
गांव छोड़ने के बाद दे रहे थे धरना
उनका कहना है कि इस्लाम कबूल करने के बाद एकदम सब कुछ ठीक नहीं होगा। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा, लेकिन कम से कम छूआछूत नहीं होगी। सतीश ने कहा कि 21 मई 2012 को 137 परिवारों ने भगाणा गांव छोड़ दिया। तब से लगातार धरने पर हैं। पहले ग्राम स्तर, जिला और फिर दिल्ली में धरना दिया। गांव छोड़ने के बाद भी 23 मार्च 2014 को गांव की चार दलित लड़कियों को अगवा कर दुष्कर्म किया गया। इसके कुछ समय बाद 25 अगस्त 2014 को दलितों के घरों पर फायरिंग की गई। गांव की ही एक दलित लड़की से 8 मार्च 2015 को दुष्कर्म किया गया।

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