झेलम एक्सप्रेस ट्रेन हादसे के बाद रद्द हुईं 10 से ज्यादा गाडियां और 3 ट्रेनों के बदले गए रूट

जालंधर जालंधर-लुधियाना रेलखंड पर फिल्लौर-लाडोवाल स्टेशन के बीच कल देर रात जम्मू तवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने के बाद उत्तर रेलवे ने आज नौ गाड़ियों को रद्द कर दिया , तीन गाड़ियों का मार्ग परिवर्तित किया गया और चार गाड़ियों के परिचालन समय में बदलाव किया गया। उत्तर रेलवे के फिरोजपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुज प्रकाश ने आज सुबह ‘भाषा’ को बताया कि जम्मू से पुणे जा रही झेलम एक्सप्रेस के दस डिब्बों के पटरी से उतरने की घटना का असर ट्रेनों के परिचालन पर पडा है और इस सिलसिले में नौ गाडियों का परिचालन आज रद्द कर दिया गया। प्रकाश ने बताया कि जिन रेलगाड़ियों को रद्द किया गया है उनमें शताब्दी नयी दिल्ली-अमृतसर, अमृतसर-नयी दिल्ली शान ए पंजाब, जालंधर नयी दिल्ली एक्सप्रेस, अमृतसर नयी दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस, अमृतसर हरिद्वार जनशताब्दी, अमृतसर चंडीगढ, चंडीगढ अमृतसर तथा नंगलडैम अमृतसर एक्सप्रेस के अलावा तीन पैसेंजर गाडियां भी शामिल हैं। गौरतलब है कि जम्मूतवी से पुणे जा रही झेलम एक्सप्रेस के डिब्बे कल देर रात जालंधर-लुधियाना रेल खंड पर सतलुज नदी पर बने पुल के पास पटरी से उतर गए, जिससे दो लोग मामूली रूप से घायल हो गए।घायलों को लुधियाना के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फिरोजपुर रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुज प्रकाश ने आज सुबह ‘भाषा’ को बताया कि जम्मूतवी से पुणे जा रही झेलम एक्सप्रेस (11078 अप) के पेंट्री कार सहित दस डिब्बे फिल्लौर और लाडोवाल स्टेशनों के बीच सतलुज नदी पर बने पुल से ठीक पहले पटरी से उतर गए ।
रेल अधिकारी ने बताया कि देर रात तीन बजकर 10 मिनट पर हुए इस हादसे में किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है। हादसे में दो यात्रियों को मामूली चोट आयी है जिन्हें लुधियाना के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारी ने बताया कि पटरी से उतरने वाले डिब्बों में पेंट्री कार बी-5 तथा एस एक से लेकर एस आठ तक के डिब्बे शामिल हैं। यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से नाश्ते का इंतजाम भी करवाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद रेल यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस बीच ट्रेन हादसे के कारण अमृतसर-चंडीगढ, चंडीगढ-अमृतसर एवं अमृतसर-नयी दिल्ली सहित नौ गाड़ियों को रद्द कर दिया गया है और तीन गाडियों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है । अधिकारी ने बताया कि अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और फिरोजपुर रेलवे स्टेशनों पर आपातकालीन नंबर शुरू किया गया है और वह स्वयं मौके पर पहुंच रहे हैं ।

अटारी सीमा पर फहराया देश का सबसे ऊंचा तिरंगा

अमृतसर स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी के सराहनीय प्रयासों की बदौलत देश के सबसे ऊंचे 360 फुट की ऊंचाई में स्थानीय अटारी सीमा पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराने की रस्म निश्चित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को अदा कर दी गई। हालांकि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पहले से लहरा रहा था, लेकिन उसे पूरी ऊंचाई तक नहीं ले जाया गया था, लेकिन जोशी के वहां पहुंचने के पश्चात तिरंगे को निश्चित बताई गई ऊंचाई तक ले जाने की रस्म पूरी की गई। इस दौरान जोशी ने अपने छोटे बेटे अमित से बटन दबवा कर यह रस्म पूरी करवाई। इस दौरान जोशी ने कहा कि अटारी सीमा पर फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश का सबसे ऊंचा तिरंगा है, जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान मिलना तय है, लेकिन इसे गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान दिलाने का प्रयास किया जाएगा, क्योंकि अटारी सीमा पर लगाया गया यह तिरंगा सारे देश में ही नहीं, बल्कि विश्व में सबसे ऊंचा माना जा रहा है। इस दौरान बी.एस.एफ. के जवानों ने संगीतमय धुन में राष्ट्रगान सुनाकर जहां सभी दर्शकों को राष्ट्रगान की धुन में मस्त कर दिया, वहीं जोशी ने बी.एस.एफ. के जवानों के साथ तिरंगे को सलामी भी दी। पत्रकारों से जोशी ने कहा कि उनका यह सपना था कि भारत-पाक सीमा अटारी पर देश का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाना चाहिए, क्योंकि यहां पर देश के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, बल्कि विश्व भर से अलग-अलग देशों से रोजाना हजारों की संख्या में लोग रिट्रीट सैरेमनी देखने आते हैं, इसलिए देश व विश्व का सबसे ऊंचा तिरंगा देख जहां देशवासियों व देश के जवानों का जज्बा बढ़ेगा, वहीं सीमा पार देश के दुश्मनों के हौसले भी पस्त होंगे। यही नहीं, इतना ऊंचा तिरंगा देखने के लिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों में बढ़ौतरी होगी, जिससे राज्य व केंद्र सरकार की आय के स्रोत बढऩे के साथ-साथ टूरिज्म प्रफुल्लित होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, इसलिए उन्होंने जो यह सपना संजोया हुआ था, उनका यह सपना आज जाकर साकार हुआ है। आई.जी. बी.एस.एफ.डी.आई.जी. बी.एस.एफ. के पद से आई.जी. के पद पर प्रमोट होकर दिल्ली स्थानांतरित हुए बी.एस.एफ. के आई.जी. मुकुल गोयल भी इस कार्यक्रम में विशेष तौर पर पहुंचे हुए थे, जिनसे की गई विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आई.सी.पी. अटारी में देश में सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लगाने की योजना उन्होंने ही तैयार की थी। इस संबंध में उन्होंने ही स्थानीय निकाय मंत्री पंजाब अनिल जोशी को सुझाव दिया था, जिन्होंने उनके इस सुझाव पर अपनी पूरी सहमति देते हुए यह काम करवाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यह जोशी साहिब के साथ-साथ उनका भी सपना था कि सबसे ऊंचा तिरंगा आई.सी.पी. अटारी में ही लगे।

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