राजस्थान में नदी के तेज बहाव में बह गए कुशलगढ़ एसडीएम, गाड़ी का ड्राइवर बचा

जयपुर। बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखण्ड अधिकारी रामेश्वरदयाल मीणा शुक्रवार सुबह बांसवाड़ा से कुशलगढ़ जा रहे थे। इस दौरान वे बिलड़ी के पास ढेबरी नदी पुल को पार कर रहे थे कि नदी का बहाव अचानक तेज हो गया, जिससे उनकी गाड़ी पानी में बह गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एसडीएम मीणा और वाहन चालक दोनों गाड़ी में से कूद गए थे। चालक करीब दो किलोमीटर की दूरी पर तैर कर बाहर निकला। एसडीएम मीणा के नदी में बहने की घटना से जिला प्रशासन ने राहत कार्य पूरी तरह से मुस्तैद कर दिए हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद जिला कलेक्टर आैर एसपी सहित अन्य अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। एसडीएम को तलाशने के लिए आसपास के थानों के जाप्ता लगाया गया है। साथ ही ग्रामीण भी उन्हें तलाशने में जुटे हैं। एसपी कालूराम रावत ने बताया कि एसडीएम कुशलगढ़ लौट रहे थे। तभी रास्ते मे बागीदौरा और कुशलगढ़ के बीच एक रपट पर करीब पांच से साथ फीट की चादर चल रही थी। जिसकी अनदेखा कर एसडीएम के चालक ने वाहन पानी मे उतार दिया। पाने के तेज बहाव में वाहन बह गया। इससे करीब दो किलोमीटर दूर चालक किसी पेड़ के सहारे से अटक गया लेकिन एसडीएम का कहीं पता नही चला। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गर्इ। बांसवाड़ा में गुरुवार शाम से ही बारिश हो रही है। बारिश का दौर जारी होने से जहां सुरवानिया बांध और हेरो डेम में पानी की आवक तेज हो गई है, वहीं कुछ गांवों में दुकानों में पानी घुस गया है। उदयपुर मार्ग पर नीलगिरी के पेड़ गिर गए जिससे रास्ता जाम हो गया। कुछ गांवों में रात से ही बिजली गुल है। बांसवाड़ा जिले में लगातार बारिश होने से सुरवानिया नदी उफान पर है। नदी में उफान के चलते कर्इ लोग फंस गए हैं। जिले का दूसरा बड़ा सुरवानिया डेम में पानी की आवक तेज गति से शुरू हो गई है। बांध की भराव क्षमता 12.3 मीटर है, अभी तक 11.7 मीटर तक भर चुका है। गेट आज खुलने की संभावना है। ठीकरिया सहित आस-पास के क्षेत्र में स्थित खेत पानी से लबालब हो गए है।

आनंदपाल जैसे गैंगस्टर के लिए धड़कता है राजपूतों का दिल?

जयपुर जीते जी मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर आनंदपाल सिंह पुलिस और सरकार की नाक में दम किए था. अब पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके परिवार और समर्थकों के गुस्से की आग से सरकार तप रही है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक को आनंदपाल का एनकाउंटर झुलसा रहा है. आनंदपाल मौत के बाद भी सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है. उसके लिए राजपूत समाज आंदोलन और हिंसा पर उतर आया है. करीब 50 हजार से अधिक लोग सड़कों पर तांडव कर रहे हैं. वे लोग आनंदपाल को रॉबिनहुड मानते हैं. अपने समाज का अगुआ समझते हैं. वह धड़कन की तरह उनके दिलों में धड़क रहा है. राजस्थान में आतंक का दूसरा नाम बन चुका आनंदपाल पुलिसवालों के हाथों मर कर भी पुलिसवालों का शिकार कर रहा है. जिंदा रहते आनंदपाल कई पुलिसवालों को अपनी गोली का निशाना बना चुका था. अब राजस्थान सरकार की नींद हराम कर रखी है. सियासत से निकले इस अपराधी की मौत पर जमकर सियासत हो रही है. आनंदपाल के परिवार वालों ने पिछले 3 हफ्ते से उसका अंतिम संस्कार नहीं किया है. उसका शव अबतक फ्रीजर में रखा हुआ है. आनंदपाल के एनकाउंटर पर सियासत भी तेज हो चुकी है. परिवार और राजपूत समाज लगातार वसुंधरा राजे सरकार पर साजिश का आरोप लगा रहा है. एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं. राजपूत करणी समाज का कहना है कि पहले आनंदपाल के खिलाफ साजिश की गई. उसको फर्जी एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया. सरकार उसके परिवार को इंसाफ दिलाने वालों के खिलाफ साजिश कर रही है. सियासत का ये पहलू सिर्फ राजपूत समाज तक ही नहीं है. कांग्रेस ने भी वसुंधरा सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार को सीबीआई जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी साफ करना चाहिए. जाहिर है आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद उसके परिवार के साथ खड़े हज़ारों लोग एक बड़ा वोट बैंक भी हैं. ऐसे में एक गैंगस्टर के एनकाउंटर के बाद से मचे बवाल पर सियासत भी लाज़मी है.

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