पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों को बचा रहे हैं वसुंधरा के करीबी - तिवाड़ी

जयपुर। भाजपा के बागी नेता और विधायक घनश्याम तिवाडी ने राजस्थान के डीडवाना में लगे देशद्रोही नारों में परिवहन मंत्री यूनुस खांन से तत्काल इस्तीफा देने और पूरे घटनाक्रम की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग की है। तिवाडी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि राजस्थान जैसे शांति प्रिय राज्य में पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत मुर्दाबाद जैसे नारे लगाना शहीदों की शहादत का अपमान है और इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी मांग की कि यदि परिवहन मंत्री इस्तीफा नहीं देते है तो उन्हें तत्काल बर्खास्त करें।उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार देश विरोधी नारे लगाने वाले डीडवाना के भारतीय जनता पार्टी से संबंद्ध लोग थे जिनमें मोहसिन खान को परिवहन मंत्री यूनुस खां की मर्जी पर ही नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिकों का मानना है कि देश विरोधी नारे लगाने वालों को खान का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व नागौर से पकडे गये जासूसों के संबंध भी परिवहन मंत्री से रहने की जानकारी मिली है।उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस द्वारा इस संबंध में की जा रही कार्यवाही केवल लीपापोती है और परिवहन मंत्री के पद पर रहते इस घटना की सही जांच होने पर संदेह है। उन्होंने कहा कि राजस्थान का शेखावाटी और नागौर का क्षेत्र देश में शहादत के लिये प्रसिद्ध है और इन क्षेत्रों में राष्ट्र विरोधी नारेबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि गत दो जून को डीडवाना में पुलिस थाने के समक्ष हुयी इस घटना का विरोध करने वाले लोगों पर ही पुलिस कार्यवाही की गई जो बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ऐसी कार्यवाही से देशद्रोहियों के खिलाफ आवाज उठनी ही बंद हो जायगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान सीमावर्ती प्रदेश है और यहां देशद्रोह से जुडी घटनाओं को गंभीरता से लेनी चाहिए।तिवाडी ने केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से राजस्थान के डीडवाना में हुई इस वारदात को गंभीरता से लेने का आग्रह करते हुए कहा कि इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ ठोस कार्यवाही की जाए।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव

'मोर को ब्रह्मचारी' बताने वाले जस्टिस शर्मा का एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के जिस जज ने बुधवार को गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का सुझाव दिया, उन्होंने राष्ट्रीय पक्षी मोर के बारे में एक अलग ही नजरिया पेश किया. जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने कहा, 'जो मोर है, ये आजीवन ब्रह्मचारी होता है. वह कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता. इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है और मोर या मोरनी को जन्म देती है.' उन्होंने कहा कि मोर ब्रह्मचारी है, इसलिए भगवान कृष्ण अपने सिर पर मोरपंख लगाते हैं. गाय के अंदर भी कई सारे दिव्य गुण हैं, जिन्हें देखते हुए इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए.' गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव देने के अलावा जस्टिस शर्मा ने राजस्थान सरकार से कहा कि यह सुनश्चित किया जाए कि गोवध करने वालों को आजीवन कारावास की सजा दी जाए. अपनी सेवा के अंतिम दिन पारित आदेश में जस्टिस शर्मा ने कहा, 'नेपाल हिंदू राष्ट्र है और उसने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर रखा है. भारत मुख्यत: कृषि प्रधान देश है जो पशुपालन पर आधारित है. संविधान के अनुच्छेद 48 और 51 ए (जी) के मुताबिक राज्य सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह इस देश में गाय के लिए कानूनी रास्ता अख्तियार करेगी.'बाद में एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके निर्देश अनुशंसात्मक हैं न कि बाध्यकारी. उन्होंने कहा, 'यह मेरी आत्मा की आवाज है.' बुधवार को रिटायर होने वाले जस्टिस शर्मा अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत करना चाहते हैं.

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