तमिलनाडु की राजनीति से शशिकला की छुट्टी, एक हुए एआईएडीएमके के दोनों धड़े

तमिलनाड़ु की राजनीति आज एक बार फिर बड़े बदलाव की साक्षी बनी, जब एआईडीएमके के दोनों धड़ों (पन्नीरसेल्वम और पलानीस्वामी गुट) ने हाथ मिलाते हुए विलय की घोषणा कर दी। इसी के साथ ही राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति भी खत्म हो गई। इस विलय से सबसे बड़ा झटका पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी शशिकला को लगा, जिनका अब राजनीतिक हाशिये पर जाना तय है। इस मर्जर के संकेत बीते कई दिनों से मिलने लगे थे जब दोनों धडों ने एक दूसरे के प्रति नरम रुख दिखाते हुए सुलह के संकेत दिए थे। एक होने की संभावना होते देख दोनों गुटों के सुलहकार सक्रिय हो गए और विलय की संभावनाओं पर मंथन शुरू कर दिया था। कई दौर की मीटिंग के बाद विलय की पटकथा तय हुई, इसके लिए सोमवार का दिन तय किया गया। दोपहर दो बजे के करीब दोनों गुट एआईएडीएमके हेडक्वार्टर पहुंचे और बातचीत शुरू हुई। बैठक के लिए निकलने से पहले खुद पूर्व सीएम पनीरेसल्वम ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। आधे घंटे की बातचीत के बाद ही दोनों गुटों ने एक होकर विलय की घोषणा कर दी। वहीं इस दौरान इस पर भी सहमति बनी कि पार्टी महासचिव रही शशिकला को भी पार्टी से बाहर कर दिया जाए।इससे पहले रविवार को मीडिया से बातचीत में भी ओ. पन्नीरसेल्वम ने कहा था कि जल्द ही इस पर अच्छी खबर मिल सकती है। हम पहले की ही तरह संगठित होंगे और पार्टी में किसी परिवार का दखल नहीं होगा। बता दें कि तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कई महीने से चल रहा एक ही पार्टी के दो धड़ों में विवाद जल्द खत्म हो सकता है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत के बाद से ही पन्नीरसेल्वम और पलानीस्वामी गुट का एआईएडीएमके में विवाद चल रहा था। जयललिता की मौत के बाद उनके विश्वासपात्र पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया गया ‌था, लेकिन कुछ दिन बाद ही शशिकला ने पार्टी पर प्रभाव बढ़ाते हुए उनसे इस्तीफा ले लिया। शुरूआत में पनीरसेल्वम ने भी शशिकला के आगे झुकते हुए पार्टी हित में इस्तीफा देने की बात कही लेकिन एक दिन बाद ही वह पलट गए और इस्तीफे के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा दिया। जिसके बाद पार्टी में खींचतान शुरू हो गई। पनीरेसल्वम के सहयोग में कई और सदस्यों ने भी मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद शशिकला के दबाव में सभी को पार्टी से बाहर कर दिया गया। पनीरसेल्वम की छुट्टी कर शशिकला ने खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की पटकथा तैयार कर दी, लेकिन उनकी इस मंशा पर सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय ने पानी फेर दिया। जिसमें आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चार साल की सजा को बरकरार रखते हुए जेल भेजने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शशिकला खुद तो मुख्यमंत्री नहीं बन पाई लेकिन उन्होंने नया दांव चलते हुए सी पलानीसामी को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया और पार्टी की बागडोर अपने भतीजे टीटीवी दिनाकरण को सौंप दी। इसके बाद से ही तमिलनाडु और एआईएडीएम के राजनीति में खींचतान चलती रही। जिसका अंत आज दोनों गुटों में विलय के साथ हुआ।

बड़े बदलाव की ओर एआईएडीएमके, महासचिव पद से हटाई गईं शशिकला

चेन्नई: एआईएडीएमके ने एक अहम फैसला लेते हुए पार्टी की महासचिव वीके शशिकला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उनसे पार्टी का महासचिव पद छीन लिया गया है।इससे पहले हाईकोर्ट में पार्टी ही एक विधायक ने इन दोनों को एएमएडीएमके से बाहर करने के लिए याचिका लगाई थी। इस बीच शशिकला समर्थक नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा कोई भी फैसला लिया जाता है तो उनका यह कदम विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान अपनी हार के लिए मंच तैयार करने वाला फैसला साबित होगा। वहीं, पलानीस्वामी गुट के नेताओं का कहना है कि शशिकला को अगर पार्टी से बाहर किया जाता है तो उनका खेमा कमजोर होगा साथ ही सत्तारूढ़ पक्ष में विधायकों को शामिल करने में दिक्कत आएगी। इतना ही नहीं पार्टी को सत्ता में आने के एक साल बाद ही चुनावों का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि, इस फैसले पर अब मद्रास हाईकोर्ट की मुहर का इंतजार है, जिसने कल इस बैठक को हरी झंडी दी थी. क्योंकि इस बैठक के खिलाफ शशिकला के समर्थकों ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. इस बैठक में शशिकला के 18 समर्थक विधायक शरीक नहीं हुए. एआईएडीएमके की इस बैठक में 2000 सदस्यों ने हिस्सा लिया. डिप्टी सीएम ओ पनीरसेवलम को 11 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी का चीफ बनाया. इसके साथ ही सीएम ई पलानीसामी और ओ पनीरसेवलम गुट के विलय को औपचारिक रुप दिया गया है. ओ पनीरसेवलम गुट की मांग थी कि शशिकला को पार्टी से निकाला जाए. शशिकला ने जयललिता के निधन के बाद ओ पनीरसेवलम को सीएम पद से हटने पर मजबूर किया था. दोनों गुटों के विलय के साथ ये फैसला हुआ कि ओ पनीरसेवलम अब ई पलानीसामी की कैबिनेट में डिप्टी चीफ मिनिस्टर होंगे. दूसरी तरफ डीएमके नेता एमके स्टालिन ने कल गवर्नर से मुलाकात की थी और दावा किया था कि उनके पास 119 विधायक हैं. स्टालिन के साथ शशकिला के भतीजे दिनाकरन भी थे. बहुमत के लिए 117 का आंकड़ा चाहिए, क्योंकि विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 234 है. हालांकि, युनाटेड एआईएडीएमके ने 124 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. दिनाकरन का साफ कहना है कि सीएम ई पलानीसामी इस्तीफा दें. अगर वो इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनकी सरकार गिरा दी जाएगी.

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