23 को दोबारा तमिलनाडु की कुर्सी संभालेंगी जयललिता

चेन्नई हाल ही में जेल से बाहर आईं एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता 23 मई को दोबारा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी. मौजूदा मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम 22 तारीख को पद से इस्तीफा दे देंगे. एआईएडीएमके की प्रवक्ता सीआर सरस्वती ने यह जानकारी दी है. इससे पहले आय से अधि‍क संपत्ति‍ मामले में जयललिता जेल में सजा काट रही थीं. लेकिन हाल ही में कर्नाटक हाई कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उस फैसले को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्हें 4 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. कोर्ट ने जयललिता समेत सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया था. कोर्ट के फैसले के बाद जयललिता ने इसे 'यह न्याय की जीत' बताया था. उन्होंने कहा था, 'यह उन लोगों की हार है जो मेरी और एमजीआर की विरासत को बदनाम करने की साजिश रच रहे थे. यह मेरी नहीं बल्कि‍ सच की जीत है. यह तमिलनाडु के लोगों की जीत है.' जयललिता के शपथ ग्रहण में राजनीतिक जगत के कौन दिग्गज शामिल होंगे, यह अभी साफ नहीं है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी दोस्ती जगजाहिर है. बरी किए जाने के बाद प्रधानमंत्री ने भी उन्हें फोन करके बधाई दी थी. जयललिता ने जब 2011 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तब मोदी उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. वहीं अगले वर्ष जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तब जयललिता उस कार्यक्रम में पहुंची थीं. करीब 67 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति मामले में जस्टिस कुमारस्वामी ने यह फैसला सुनाया था. जयललिता ने मामले में बेंगलुरु स्पेशल ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी दी थी. पिछले साल 27 सितंबर को विशेष अदालत के न्यायाधीश माइकल डी कुन्हा ने जयललिता को 4 साल जेल और 100 करोड़ रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी. इसके अलावा उनकी सहयोगी एन शशिकलास, जे एलवरसी और दत्तक पुत्र वी एन सुधाकरन को भी चार-चार साल की सजा और 10 -10 लाख रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई थी. यह 1996 का मामला है.

जल्द ही सीएम बनेंगी जयललिता

 6 महीने के भीतर करवा सकती हैं विधानसभा चुनाव
 चेन्नई एआईएडीएमके के विधायक कुछ ही दिनों में मिल कर जयललिता को पार्टी की नेता और मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति दे सकते हैं. कुछ ही दिनों में नए कैबिनेट के साथ उनकी ताजपोशी भी हो सकती है. इन तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ावों के बीच जो समीकरण बैठ रहे हैं, उनसे कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि जयललिता तमिलनाडु में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने के मूड में हैं.
कोर्ट से जयललिता को अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 6 महीने के भीतर ही उन्हें विधायक का चुनाव लड़कर जीतना अनिवार्य होगा. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव भी एक साल के भीतर ही होने वाले हैं, ऐसे में जयललिता नहीं चाहेंगी कि वह 6 महीने के भीतर ही दो बार जनता के बीच चुनाव में उतरें. राजनीतिक पंडितों की मानें तो इसका एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि जयललिता जनता से मिल रही सहानुभूति को भी जल्द से जल्द भुना लेना चाहेंगी.
आय से अधि‍क संपत्ति मामले में जयललिता को कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को बड़ी राहत दी थी. कोर्ट ने विशेष अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री को 4 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. हालांकि जयललिता के दिमाग में क्या चल रहा है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है क्योंकि हाई कोर्ट के फैसले के बाद से उन्होंने अभी तक पार्टी के किसी से भी बड़े नेता से मुलाकात नहीं की है यहां तक कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले पनीरसेल्वम से भी उनकी मुलाकात अभी नहीं हुई है.
 

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