शशिकला को 30 दिनों की पेरोल, शाम को आएंगी जेल से बाहर

, तमिलनाडु की राजनीति में आएगी गर्मी भ्रष्टाचार के मामले में 4 साल की सजा पा चुकी वीके शशिकला को 30 दिनों की पेरोल मिल गई है। शशिकला आज शाम तक जेल से रिहा हो सकती हैं। उन्हें बेंगलुरू की जेल में रखा गया है। उनके पेरोल पर जेल से बाहर आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति के गरमाने के संकेत मिल गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शशिकला को 30 दिनों की पेरोल मिल गई है। शशिकला के अलावा उनके भतीजे और एआईएडीएमके के डेपुटी जनरल सेक्रेटरी टीटीवी दिनाकरण भी दिल्ली के तिहाड़ जेल से छूट गए हैं। शशिकला की रिहाई के तुरंत बाद दोनों की बेंगलुरू में ही मुलाकात होनी है। इससे पहले, घूस देने के मामले में दिल्ली के तिहाड़ बंद रहे टीटीवी दिनाकरण ने जेल से छूटने के बाद कहा था कि वो सोमवार को बेंगलुरू जेल में शशिकला से मुलाकात करेंगे। पर शशिकला के भी जेल से बाहर आ जाने के बाद अब दोनों तमिलनाडु की राजनीति में दखल बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

तमिलनाडु: पलानीसामी को हटाने की मांग कर रहे दिनाकरन गुट के 18 विधायक अयोग्य करार

चेन्‍नई। तमिलनाडु राज्‍य विधानसभा के स्‍पीकर पी धनपाल ने सोमवार को 18 विधायकों को अयोग्‍य घोषित कर दिया। स्‍पीकर का यह फैसला दिनाकरण के लिए बड़ा झटका साबित होगा। अयोग्‍य करार दिए गए अन्‍नाद्रमुक के इन विधायकों के नामों की लिस्‍ट भी जारी हो गई है। अयोग्‍य घोषित विधायकों में थांगा तमिलसेल्‍वन, सेंथिल बालाजी, पी वेत्रीवल और के मरियप्‍पन भी शामिल हैं। तमिलनाडु विधानसभा में 1986 पार्टी डिफेक्‍शन लॉ के तहत प्रवक्‍ता ने यह आदेश दिया। बता दें कि ये विधायक मुख्‍यमंत्री ई. पलानीस्‍वामी को हटाए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन स्‍पीकर पी धनपाल ने इन्‍हें अयोग्‍य घोषित कर दिया।एआईएडीएमके के पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम के गुटों के विलय के बाद भी तमिलनाडु में राजनीतिक घमासान जारी है। इस विलय के बाद पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम ने एआईएडीएमके की महासचिव शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन को पार्टी में अलग-थलग कर दिया है। इस विलय से नाखुश दिनाकरन गुट के 18 विधायकों ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को हटाने की मांग की थी। विधायकों ने कहा कि पलानीस्वामी के पास बहुमत नहीं है। विधायकों ने राज्यपाल से मिलने से पहले दिनाकरन के आवास पर उनसे मुलाकात की। 18 बागी विधायकों के इस बर्ताव को एआईएडीएमके पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। दोनों गुटों के विलय के बाद एआईएडीएमके के पास 234 सदस्यों वाली विधानसभा में कुल 134 विधायक हैं। दिनाकरन गुट के 18 विधायकों का समर्थन नहीं मिलने पर पलानीस्वामी की सरकार को विश्वास मत के लिए 118 के आंकड़े को छूने में काफी मुश्किल आएगी। मुख्य विपक्षी दल डीएमके पहले ही इस बात के संकेत दे चुकी है कि अक्टूबर में विधानसभा के सत्र की शुरुआत होने पर वह अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकती है। पिछला अविश्वास प्रस्ताव अप्रैल में पेश किया गया था। विपक्ष द्वारा पेश किए जाने वाले दो अविश्वास प्रस्तावों के बीच 6 महीने का अंतराल होना जरूरी है।

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