रिफाकत अली खॉन होंगे नए चैयरमैन

अलीगढ़। प्रोफेसर रिफाकत अली खॉन राव अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेडएच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नालोजी के एप्लाइड कैमिस्ट्री विभाग के नए चैयरमैन होंगे। वह आगामी एक जुलाई को वर्तमान चैयरमैन प्रोफेसर मुहम्मद मुबीन से अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। प्रोफेसर रिफाक़त अली खॉन का कार्यकाल तीन वर्ष के लिए होगा।

नायाब अब्बासी में हुई बैठक, वक्ताओं ने कोर्ट के फैसले पर जताई खुशी

अमरोहा, अ.हि.ब्यूरो।.मुस्लिम एजुकेशनल इंटीट्यूशंस वेलफेयर एसोसिएशन की एक बैठक अमरोहा कैलसा मार्ग स्थित नायाब अब्बासी गल्र्स पीजी कॉलेज में आयोजित हुई। जिसमें हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा लिए गए फैसले पर खुशी जाहिर की गई। बैठक को संबोधित करते हुए हाशमी ग्रुपके अध्यक्ष डा.सिराजउद्दीन हाशमी ने कहा कि नायाब अब्बासी गल्र्स कॉलेज के प्रबंधक एम असलम फारुखी ने पूरे प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के अधिकारों के संरक्षण हेतु मा.उच्च न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़ी जिसमें अल्पसंख्यक संस्थानों की जीत हुई है जहां अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित है तो दूसरी ओर न्यायपालिका पर अल्पसंख्यकों का भी विश्वास बनाए रहा है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुनीत कुमार ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर किसी भी तरह का आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता अल्पसंख्यक संस्थान अपने कोटे में किसी भी धर्म जाति या समुदाय के लोगों को प्रवेश दे सकते हैं लेकिन इस अनुपात ऐसा हो कि अल्पसंख्यक चरित्र प्रभावित न हो याद रहे कि दुर्लभ अब्बासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में बीएड सत्र 2014.15 में अपने पचास सेट के कोटे में जहां 41 मुस्लिम छात्राओं को प्रवेश दिया था तो नौ गैर मुस्लिम छात्राओं को भी प्रवेश कर लिया था लेकिन एम जे पी रो एड़ी खंड यूनोरस्टे बरेली ने नौ छात्राओं के परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था उसका कहना था कि अल्पसंख्यक संस्था केवल अपने धर्म के लोगों को ही प्रवेश कर सकते हैं जो संस्था क़ायम किया है श्री फ़ारूक़ी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपना मामला पेश किया जहां न्यायाधीश सुनीता कुमार ने यूनोरस्टे को कड़े शब्दों में लताड़ा और खा के शिक्षा के मामले में भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में भेदभाव मानसिकता स्वीकार्य नहीं है उन्होंने रजिस्ट्रार और वी सी को आदेश दिया के उन नौ छात्राओं को अन्य छात्राओं के साथ पहली जुलाई से होने वाले बीएड की वार्षिक परीक्षा में शामिल किया जाए इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि आज भी न्यायपालिका में उनका पूरा विश्वास और भरोसा है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करती है एम. असलम फ़ारूक़ी ने इस फैसले को जहां अल्पसंख्यकों अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण बताया तो दूसरी ओर उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया जिनके सहयोग से यह लड़ाई जीती गई बैठक में मोहम्मद कासिम तर्क, अरमान सिद्दीकी, मोहम्मद मुर्तज़ा, नासिर अली सहित भारी संख्या में एसोसिएशन के लोग मौजूद थ

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