रमजान में गीबत से बचना जरूरी

हसनपुर, अ.हि.ब्यूरो। रमजान शुरू होते ही नेकियों का खजाना खुल गया है। लोग इस दौरान बेशुमार नेकियां कर जन्नत में अपनी जगह बना सकते हैं, लेकिन रमजान में कुछ चीजों का ख्याल रखना जरूरी है। अगर गुनाहों से नहीं बचे तो दुश्वारियां भी बढ़ सकती हैं। सपा अल्पसंख्यक सभा के नगर अध्यक्ष अब्दुल गफफार खां कहते हैं कि रमजान में गीबत से बचना जरूरी है। गीबत का मतलब पीठ के पीछे किसी शख्स की बुराई करना है। गीबत रोजे को खराब कर देती है। अक्सर लोग रोजे के दौरान एक दूसरे की बुराई करने में लगे रहते हैं। इसका ख्याल भी नहीं रखते कि रोजे से हैं। जबकि रिवायतों में गीबत से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। कुरान में भी गीबत से बचने को कहा गया है। उंहोने कहा कि लोग रमजान में काम बात करें। जरूरी बातें ही करें, ताकि गलत बयानी न होने पाए। इसके अलावा जो आदमी मौजूद न हो, उसकी बात करने से बचें। अगर कोई दूसरा शख्स किसी की बुराई में लगा हो तो उसे याद दिलाए कि उसका रोजा है। गीबत करके रोजा खराब न करें।

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