योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश और राहुल के गठबंधन पर बोला बड़ा हमला

ट्रंप की मुस्लिम देशों के लोगों पर लगाई पाबंदी सही, भारत में भी ऐसा ही होना चाहिए : योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर: मुस्लिम-बहुल सात देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर पाबंदी लगाने के चौतरफा आलोचना झेल रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद योगी आदित्यनाथ ने तारीफ की है, और कहा है कि आतंकवाद को रोकने के लिए भारत में भी इसी तरह की कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है. योगी आदित्यनाथ यहीं नहीं रुके, और उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से हिन्दुओं के 'पलायन' के दावों को सच बताते हुए चेतावनी दी कि जल्द ही यह क्षेत्र भी 'एक और कश्मीर' बन जाएगा. बुलंदशहर में एक रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाए कदमों का ज़िक्र करते हुए कहा, "इस देश में भी आतंकवाद पर काबू पाने के लिए ऐसी ही कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है..." गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद ने यह आरोप भी लगाया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी हिन्दुओं को बिल्कुल उसी तरह आतंकित किया जा रहा है, जिस तरह 'कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों को डराकर घाटी से भाग जाने के लिए मजबूर किया गया था...' उन्होंने कहा कि मुज़फ्फरनगर, बागपत, मेरठ और गाज़ियाबाद में हालात खासतौर से खराब हैं. योगी आदित्यनाथ ने इन हालात के लिए सत्तासीन समाजवादी पार्टी (एसपी) और पूर्व मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की नीतियों को दोषी ठहराया. लोकसभा सांसद ने कहा, "जो कुछ 1990 में कश्मीर में हुआ था, वही यूपी में होने जा रहा है..." योगी आदित्यनाथ ने कहा, "बीजेपी आइंदा ऐसा नहीं होने देने के प्रति कटिबद्ध है... हम कश्मीर घाटी को खो चुके हैं, लेकिन हम पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दूसरा कश्मीर नहीं बनने दे सकते..." पिछले साल बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने आरोप लगाया था कि हिन्दू परिवार वर्ष 2013 में हुए दंगों के बाद धमकियों और हमलों की वजह से मुस्लिम-बहुल कैराना को छोड़कर जा रहे हैं, और उन्होंने 300 से ज़्यादा परिवारों की सूची भी जारी की थी, जो कथित रूप से इलाका छोड़कर चले गए हैं. एसपी तथा बीएसपी - दोनों ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे इलाके में वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश बताया था. कैराना इलाका मुज़फ्फरनगर जिले का ही हिस्सा है, और लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर बसा है. गौरतलब है कि सितंबर, 2013 में हुए दंगों के दौरान मुज़फ्फरनगर में 60 से ज़्यादा लोग मार डाले गए थे, और हज़ारों लोग बेघर हो गए थे. हालांकि बीजेपी सांसद अपने दावे को प्रमाणित नहीं कर पाए थे, लेकिन पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए जारी अपने चुनावी घोषणापत्र, यानी मैनिफेस्टो में कैराना को भी शामिल किया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणापत्र जारी करते हुए कहा था, "सांप्रदायिक तनाव की वजह से लोगों के इलाका छोड़कर जाने के लिए जिलाधिकारियों को जवाबदेही करनी होगी..." उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ऐसी टीमों का गठन करेगी, जो इस 'पलायन' को रोकने में मदद कर सके. अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी को यकीन है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम-बहुल इलाकों से हिन्दू परिवारों के पलायन की ख़बरें सही हैं.

बुलंदशहर गैंगरेप: पुलिस की थर्ड थ्योरी से क्या होगा सही खुलासा?

बुलंदशहर यूपी के बुलंदशहर में दिल्ली-कानपुर नेशनल हाइवे पर मां-बेटी के साथ गैंगरेप और लूटपाट मामले में पुलिस ने वारदात के मास्टरमाइंड और गैंग सरगना सलीम की गिरफ्तारी कर ली है.सलीम के साथ कन्नौज का जुबैर और शाजिद भी गिरफ्तार किए गए हैं. लगातार बयान बदल रही पुलिस की यह तीसरी थ्योरी है. सलीम बाबरिया जाति का नहीं, छैमार जाति का है. पुलिस का दावा है कि सलीम देश के 5 राज्यों में दो दर्जन से ज्यादा इसी तरह की वारदातें कर चुका है.नाम न खोलने की शर्त पर पुलिस के एक आला अधिकारी ने सलीम के गैंग और गैंगरेप मामले के खुलासे से संबधित जानकारियां ईटीवी/प्रदेश-18 को दी हैं. अधिकारी ने बताया कि सहारनपुर के गंगोह के निवासी सलीम छैमार जनजाति से है. उसके गैंग में कन्नौज, मेरठ, हापुड़, नोएडा और बुलंदशहर के बदमाश शामिल है.पुलिस ने सलीम के साथ जिन दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है उनके नाम जुबैर और शाजिद हैं. जुबैर कन्नौज का निवासी है. अधिकारी ने दावा किया है कि तीनों बदमाशों की गिरफ्तारी मेरठ और मवाना इलाके से की गयी है.
रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी जावीद अहमद ने बुलंदशहर में वारदात के खुलासे का दावा करते हुए तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही थी.डीजीपी ने बताया था यह गैंग बाबरिया जनजाति के अपराधियों का हैं. डीजीपी ने इस बातचीत के दौरान फरीदाबाद के बबलू और भटिंडा के नरेश उर्फ ठाकुर के नाम का खुलासा किया था. अगले ही दिन पुलिस ने रईस के अलावा दो आरोपियों के नाम गिरफ्तारी में बदल दिए. इसके बाद पुलिस अपराधी गैंग के स्थानीय होने के दावे करती रही.पुलिस की तीसरी थ्योरी में सलीम की गिरफ्तारी दिखाई गई है. सलीम को पुलिस के आला अधिकारी पहले से बाबरिया बता रहे थे और उसकी राजस्थान के भरतपुर में तलाश की जा रही थी. पुलिस की नई थ्योरी में सलीम बाबरिया न होकर छैमार जनजाति का निकला है. पुलिस के तीसरे खुलासे में भी कई पेंच हैं.पुलिस अभी तक इस वारदात में शामिल गैंग के बदमाशों का आपसी कनेक्शन जोड़ने से बचती रही है. बुलंदशहर के रईस को पहले मामले का मुख्यारोपी बताया गया. पुलिस ने दावा किया कि उसकी शिनाख्त पीड़ित परिवार ने की है. लेकिन स्थानीय बदमाश रईस कई महीने से इलाके में लगातार वारदातें कर रहा था और उसे कोतवाली देहात पुलिस का संरक्षण प्राप्त था.
डकैती जैसे संगीन मामलों में पुलिस ने उसे वसूली करके छोड़ दिया और केस तक दर्ज नही किया था. वारदात में रईस के साथ जेल गया जबरसिंह बाबरिया गैंग का बताया जाता है. उसकी पत्नी से भी पुलिस ने बड़ी जानकारियां हाथ लगने का दावा किया था और सलीम का डेरा भरतपुर में होना बताया था.तीसरा बदमाश शाबेज हापुड़ इलाके का है और उसका भाई परवेज शातिर लुटेरा है. पुलिस ने फिलहाल जो बदमाश गिरफ्तार किए हैं, वह भी अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखते हैं. सवाल ये है कि पूर्वी यूपी से वेस्ट यूपी की तलहटी तक फैले इस गिरोह का आपसी कनेक्शन आखिर क्या है?पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बाबरिया अपराधी किसी दूसरे गैंग के साथ अपराध नही करते, लेकिन इस वारदात में जबरसिंह का शामिल होना बाबरिया गैंग के आपराधिक नियमों के खिलाफ है. पुलिस के आला अधिकारियों का नया दावा है कि सलीम का गैंग एक रात में तीन से चार वारदातें करता था और अपने गैंग में एक स्थानीय अपराधी को शामिल करता था. तो क्या बुलंदशहर का रईस कई महीनों से सलीम गैंग के लिए बुलंदशहर में काम कर रहा था?

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