यूपी विधानसभा चुनाव 2017: पश्चिमी यूपी में जीत से ही तय होगी पार्टियों की सियासी किस्मत

नोएडा। यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है। सबकी निगाहें पश्चिमी यूपी की सीटों पर है जहां मिलने वाली बढ़त आने वाले चरणों में पार्टियों की सियासी किस्मत का फैसला करेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2.6 करोड़ वोटर हैं जो शनिवार को पहली बार वोट करेंगे। 73 सीटों पर हो रहे पहले चरण के मतदान से प्रदेश में सियासी अटकलें साफ होंगी। शनिवार को हो रहे मतदान में कई संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा कड़ी की गई है। चुनाव आयोग ने बताया कि मुजफ्फरनगर और शामली इलाकों के 887 पोलिंग बूथों पर 6000 अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं। यहां 2013 में दंगे हुए थे। दंगों के बाद पश्चिमी यूपी के कैराना में बड़ी संख्या में लोगों के पलायन की शिकायत से भी हड़कंप मचा था। चुनाव आयोग ने कहा कि जो लोग किसी भी वजह से कैराना छोड़कर चले गए थे अगर मतदान में हिस्सा लेते हैं तो उन्हें ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। पहले चरण का मतदान बेहद अहम है क्योंकि आने वाले चरणों के लिए यहां से लीक तय हो जाएगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर की रैली में कहा कि वे लोग पहले वोटर हैं और वहीं लोग चुनाव में यूपी की सियासी किस्मत की राह तय करेंगे। सरकार बनाने के लिए पश्चिमी यूपी में जीतना किसी भी पार्टी के लिए जरूरी है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिमी यूपी की सारी सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो सपा और बसपा दोनों ने 24-24 सीटें जीती थीं। इनके अलावा बीजेपी ने 11 और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार के चुनाव में सबकी नजरें मुजफ्फरनगर और शामली पर हैं। 2013 में हुए दंगों की वजह से यहां के वोटरों का रुख पहचानना सबसे बड़ी चुनौती है। सितंबर 2013 हुए दंगों में यहां कम से कम 65 लोग मारे गए थे। सपा और बीजेपी ने इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाया लेकिन बीएसपी ने जोरशोर से इस पर निशाना साधा और कहा कि मायावती के शासन में प्रदेश की कानून-व्यवस्था बेहतर थी। बीजेपी ने हालांकि कैराना में हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया। बीजेपी नेताओं ने पलायन के मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा की।

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