अब मस्जिदें भी भगवा रंग में रंगी नजर आएंगी: आजम खान

योगी का असर! यूपी के हज हाउस की दीवारें भी हुईं भगवा, वायरल रामपुर हज हाउस की दीवारों को भगवा रंग से पेंट कराए जाने पर समाजवादी पार्टी ने सूबे की बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। रामपुर में पार्टी के सीनियर लीडर आजम खान ने कहा, 'किसी दिन हम देखेंगे कि मस्जिदों को भी भगवा रंग में रंग दिया गया है।यही नहीं आजम खान ने कहा कि इस साल पहले की तुलना में हाजियों की संख्या में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भी सरकार जिम्मेदार है। सोशल मीडिया में उत्तर प्रदेश हज हाउस की एक तस्वीर वायरल हो रही है। कहा जा रहा है कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के आदेश पर यूपी हज हाउस की दीवारों को भी भगवा कर दिया गया है। हालांकि यूपी हज समिति की ऐसी तस्वीरें अब न्यूज एंजेसी एएनआई ने भी जारी की है। एक ट्वीट में लिखा गया है कि योगी आदित्य नाथ के कार्यकाल में सभी सरकारी दफ्तरों की दीवारों को उनके पसंदीदा भगवा रंग में बदला जा रहा है। मामले में विवाद बढ़ता देख अब सूबे के कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भगवा रंग एनरजेटिक और चमकीला है। इससे इमारतें खूबसूरत दिखाई देती है। विपक्ष के पास हमारे खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। इससे पहले दिसंबर में पीलीभीत के 100 से ज्यादा सरकारी स्कूल की दीवारों को भगवा कर दिया गया था।बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं जब सूबे में नई सरकार आने के बाद ऐसी खबरें सामने आई हों। इससे पहले लखनऊ में योगी के दफ्तर की इमारत पर भगवा रंग किया गया था। बाहरी दीवारों से लेकर छत पर केसरिया रंग किया गया।। अंदर सीएम के कमरे में तौलिया, मेजपोश और सोफा, सब कुछ केसरिया रंग का लगाया गया था। सीएम योगी का दफ्तर लाल बहादुर शास्त्री भवन में हैं, जिसे एनेक्सी कहा जाता है। सालों से सफेद रंग में नजर आ रहा एनेक्सी योगी काल में रंगीन हो गया। भवन के बाहर की दीवारों पर केसरिया रंग से पोत दिया गया। छत और अंदर के कमरों में भी कुछ ऐसा ही किया गया। इतना ही नहीं, सीएम इस भवन में पांचवीं मंजिल पर बैठते हैं। उनके कमरे में कुर्सी पर केसरिया रंग का तौलिया लगाया गया। जबकि मेजपोश और सोफा का रंग भी केसरिया जैसा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर देहात और गोरखपुर के डीएम को निलंबित करने का दिया आदेश

रामपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खनन के दो वर्ष पुराने मामले में सख्त रुख अपनाया है। रामपुर में तैनात रहे दो जिलाधिकारियों को निलंबित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश हुआ है। इनमें से एक आइएएस अफसर गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला तथा दूसरे अफसर कानपुर देहात के जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह हैं। इन दोनों पर हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने का आरोप है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता ने सात दिसंबर को दिए फैसले में राजीव रौतेला और राकेश कुमार के निलंबन के आदेश प्रदेश के मुख्य सचिव को दिए हैं। साथ ही मामले की पूरी जांच कराकर दोषी पाए जाने पर अन्य अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि जिले में उस समय तैनात रहे सभी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की इस मामले में भूमिका की जांच कराई जाए। यदि वह दोषी हैं और सेवानिवृत्त (रिटायर) नहीं हुए हैं तो उन पर विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में हुई कार्रवाई की रिपोर्ट 16 जनवरी को मांगी है। रामपुर जिले के दढिय़ाल निवासी मकसूद ने दो वर्ष पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर प्रशासन की शह पर अवैध खनन कराए जाने की शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2015 को प्रशासन को कार्रवाई के आदेश दिए थे। याचिका में हुसैन क्रेशर के मालिक गुलाम हुसैन नन्हें पर कोसी नदी से अवैध खनन करने का आरोप लगाया था। कोर्ट में शिकायत करने पर मकसूद पर हमला भी हुआ था। उस समय रामपुर के जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह थे। उन्होंने स्टोन क्रेशर पर कार्रवाई करते हुए सीज कर दिया था, लेकिन इनके बाद रामपुर में तैनात हुए जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने स्टोन क्रेशर का नवीनीकरण कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर मकसूद फिर हाईकोर्ट पहुंचे और अवैध खनन जारी रहने का आरोप लगाते हुए प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इस पर हाईकोर्ट ने वर्तमान जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी को तलब कर लिया। इस मामले में लगातार तीन दिन पांच से सात दिसंबर तक कोर्ट ने सुनवाई की।

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