मंदिर पर चाचा-भतीजे की जंग, शिवपाल ने कहा- 'विरोध करने वालों से सख्ती से निपटेंगे'

संभल: कल्कि मंदिर के शिलान्यास पर एक बार फिर चाचा शिवपाल सिंह यादव और भतीजे अखिलेश यादव की जंग सामने आ गई है. यूपी के संभल में कल्कि मंदिर निर्माण पर लगाई जिला प्रशासन की रोक से नाराज शिवपाल ने कहा कि विरोध करने वालों से सख्ती से निपटेंगे. केवल इतना ही नहीं इस दौरान शिवपाल ने यह भी कहा है, ‘मैं गैर कानूनी काम करने से रोक रहा था. इसलिए मुझे मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया.’ उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि मंदिर का शिलान्यास न कर पाने से नाराज़ एसपी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव अखिलेश सरकार के अधिकारियों पर बरसे और इस दौरान उनका मंत्री मंडल से बाहर होने का दर्द भी छलका. शिवपाल यादव ने अधिकारियों पर अड़चन डालने का आरोप लगाते हुए उन्हें दस दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि दस दिन के अन्दर अड़चने दूर कर मंदिर निर्माण की अनुमति दे दें.
आज संभल में आचार्य प्रमोद कृष्णम के बुलावे पर होने वाले कल्कि मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में नेता तो पहुंचे लेकिन जिला प्रशासन की सख्ती के चलते उनकी एक न चली और यहां जिला प्रशासन ने मंदिर के निर्माण पर रोक लगा दी. जिससे मंदिर का शिलान्यास कार्यक्रम नहीं हो सका. कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव मुख्य अतिथि थे लेकिन जिला प्रशासन की सख्त रोक के चलते कांग्रेस और एसपी के नेताओं को वापस लौटना पड़ा. समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद डॉ शाफीकुर्रहमान बर्क के विरोध के चलते जिला प्रशासन ने मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम पर रोक लगा दी. जिससे शिवपाल यादव खासे नाराज़ दिखाई दिए औऱ इसके चलते शिवपाल, अखिलेश सरकार के अधिकारियों पर बरसे. इस दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि ”शहीद सुदेश कुमार के घर न जाकर हमारे मंत्रियों ने गलती की है. मैं आज ही शहीद के घर जाऊंगा और मुख्यमंत्री से भी उनके यहां जाने का अनुरोध करूंगा. हमें अपने सैनिकों का सम्मान करना चाहिए.
शिवपाल यादव ने कहा कि पिछले साल मैं यहां खुद भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल हुआ था लेकिन अब जिला प्रशासन ने शिलान्यास पर रोक कैसे लगा दी. इस दौरान शिवपाल यादव ने अधिकारीयों को दस दिन में सभी अड़चने दूर कर मंदिर निर्माण की अनुमति देने का अल्टीमेटम सुना दिया. शिवपाल यादव ने कहा कि ”जिला प्रशासन को चाहिए कि वो विरोध करने वालों को समझा दें और अगर वो न मानें तो उन्हें सख्ती के साथ हिंदी में समझा दें.  ‘मैं गैर कानूनी काम करने से रोक रहा था, इसलिए मुझे मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया.’
इस दौरान मंच से शिवपाल यादव का मंत्री न होने का दर्द छलका और इसलिए वो अधिकारियों पर जमकर बरसें. शिवपाल यादव ने कहा कि मैं गलत काम करने वालों का विरोध करने के कारण आज मंत्रिमंडल से बाहर हूं. आप लोग जानते हैं की गलत लोगों को संरक्षण कौन दे रहा है? समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि उन्हें मंत्रिपरिषद से इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने अवैध कार्य करने वालों का विरोध किया था.
‘‘मैं अच्छा काम करने वालों के साथ हूं चाहे वह धार्मिक कार्य हो या कोई अन्य’’
शिवपाल ने कहा, ‘‘मैंने अवैध कार्य और भूमि कब्जा करने वालों का विरोध किया था. इसी वजह से मैं मंत्रिपरिषद से बाहर हूं.’’ शिवपाल को भतीजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले महीने अपनी कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया. उसी समय मुलायम सिंह यादव के परिवार में बर्चस्व की लड़ाई चल रही थी और चाचा भतीजे में घमासान मचा हुआ था. शिवपाल ने यहां कल्कि महोत्सव के मौके पर कहा कि वह अवैध कार्य करने वालों के खिलाफ आवाज उठाना रखना जारी रखेंगे. ‘‘मैं अच्छा काम करने वालों के साथ हूं चाहे वह धार्मिक कार्य हो या कोई अन्य.’’
इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, राज्य सभा सांसद संजय सिंह भी मौजूद रहें. इसके अलावा देश भर से साधू संत और कई राजनीतिक हस्तियों ने भी कल्कि उत्सव में भाग लिया. यहां कल्कि महोत्सव 11 नवम्बर तक चलेगा. यूपी के चुनावी माहौल में कल्कि मंदिर के निर्माण का मुद्दा राजनितिक रूप ले सकता है लेकिन उससे बड़ी बात ये कि अखिलेश सरकार के मंत्रियों पर जिस तरह शिवपाल यादव बरसे और उनपर मंदिर निर्माण में रोड़ा लगा देने का आरोप लगा गये इस से मुख्यमंत्री अपने चाचा से नाराज़ न हो जाएं.

पुलिस के लिए गले की फांस बनी प्रताप की मौत

अ.हि.ब्यूरो सम्भल। पहले पुलिस कस्टडी से भाग निकलने और अगले ही दिन आरोपी की उसी के घर में फांसी के फंदे पर झूलती लाश मिलने से पुलिस के लिए यह गुत्थी किसी रहस्य से कम नही है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस प्रताडना से प्रताप की कस्टडी मे मौत हो जाने के बाद कानूनी दावपेच मे फंसने से बचने के लिए रात को किसी वक्त घर पर फांसी पर लटका कर पुलिस ने हत्या को आत्महत्या मे दर्शाने की कोशिश की, ताकि सांप भी मर जाए लाठी भी नही टूटे। हालाकि पुलिस ने स्वीकार किया है कि आरोपी को उसके घर से गिरफतार कर कोतवाली लाया गया था , और किसी वक्त मौका पाकर वह  कोतवाली से भाग निकला। यहां बडा सवाल पैदा होता है कि जिस आरोपी युवक पर पहले से ही दर्जन भर अधिक मुकदमे थानो मे दर्ज है और उसे पकडने के लिए काफी समय से नजर रखे थे, वही हिस्ट्रीशीटर पुलिस कस्टडी से इतनी आराम से भाग निकला कि पुलिस को आभास तक नही हुआ। अगर मृतक के परिजनों की बात पर यकीन किया जाए तो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे है। आखिर पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को इतने आराम से कैसे भाग निकलने का मौका दे दिया। अभी तक की जांच पडताल में मृतक के परिजन भी संदेह के दायरे मे आ रहे है। क्योंकि परिजनो के मुताबिक पुलिस प्रताप को यातना देने के बाद मौत होने पर घर मे फांसी पर लटकाकर चली गई। वही सवाल खडा  होता है कि जिस कमरे मे लाश लटकी थी, उससे लगभग 15 फिट की दूरी पर मृृतक की बीवी पिंकी व सात वर्षीय भाई शोभित सो रहा था, जबकि आंगन मे बूढे मां बाप सोए थे।  पुलिस अगर मृतक को उसके घर फांसी पर लटकाकर गई थी, तो परिजनों को जरा भी आहट नही हुई। वही पुलिस आत्महत्या करना बता रही है, अगर पुलिस की बात सही है तब मृतक के हाथ व पैर पीछे किसने बांधे, क्योकि फांसी पर झूलते वक्त कोई भी अपने हाथ पैर पीछे  नही बांध सकता। अगर पुलिस व परिजन झूठ बोल रहे है तब प्रताप की मौत कैसे हुई, क्या किसी तीसरे ने उसे मारा, या उसकी किसी से रंजिश थी। पुलिस इन सब बिदुओं पर जांच करने मे जुटी है।

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