बीएचयू में तनाव जारी, छात्रों-डॉक्टरों में जमकर हुई मारपीट

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कल रात एक घायल छात्र के इलाज के विवाद पर रेजिडेंट डॉक्टरों और छात्रों के बीच मारपीट के बाद आधी रात तक ट्रामा सेंटर एवं धनवंतरि छात्रावास में तोडफ़ोड़ एवं आगजनी की घटनाएं हुई। छात्रों की उग्र भीड़ द्वारा रेजिडेंट डॉक्टरों के छात्रावास में जबरन घुसकर उनकी 30 मोटरसाइकिलें जलाने की घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। इसके मद्देनजर परिसर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। जिलाधिकारी विजय किरन आनंद एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने आधी रात को उग्र छात्रों को समझा बुझाकर स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की, जिससे बवाल का सिलसिला तो थम गया, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। तनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में ऐहतियातन बड़ी संख्या में स्थानीय पुलिस साथ पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। ट्रॉमा सेंटर, कुलपति कार्यालय एवं आवास, धनवंतरि छात्रावास एवं बिड़ला छात्रावास के आसपास विशेष सुरक्षा निगरानी की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि बीएचयू के बिड़ला (ए) छात्रावास में रह रहे स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र शुभम तेवतिया एक दुर्घटना में घायल हो गया था।
उसके साथी प्रभात उपाध्याय एवं आयुष सिंह उसे इलाज के लिए बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर लेकर गए, जहां आरोप है डॉक्टरों ने शुभम को भर्ती करने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों छात्रों की डॉक्टरों से कहासुनी और मारपीट हो गई। आरोप है कि दोनों छात्रों को कुछ डॉक्टरों ने एक कमरे में बंद कर दिया। इसकी सूचना बिड़ला छात्रावास पहुंचते ही बड़ी संख्या में वहां के छात्रा ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए और बवाल करने लगे। अनेक रेजिडेंट डॉक्टरों एवं बिड़ला छात्रावास के बहुत से छात्रों के बीच कई बार झड़पें एवं मारपीट हुई। छात्रों की गुस्सायी भीड़ ने ट्रॉमा सेंटर में कुछ तोड़ की। प्रशासन के बीच बचाव के बाद घायलों रस सुंदर लाल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र रेजिडेंट डॉक्टरों के धनवंतरि छात्रावास पहुंच गए और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ही तोडफ़ोड़ की और मोटसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया। बीएचयू के प्रवक्ता डॉ. राजेश सिंह के अनुसार कम से कम 30 मोटरसाइकिलों की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि आज विश्वविद्यालय का कामकाज सामान्य तरीके से चल रहा है।

दो मंजिला मकान ढहा, मलबे से जिन्दा निकाली गई महिला

वाराणसी वाराणसी के जैतपुरा स्थित शक्कर तालाब इलाके में 60 साल पुराना मकान ढह गया। ढहे मकान के मलबे में 50 वर्षीया रुखसाना बेगम दब गई। घंटों के प्रयास के बाद एनडीआरएफ ने उन्हें जिन्दा बाहर निकालने में सफलता पा ली। शक्कर तालाब में स्व. रमजान अली महतो ने 60 साल पहले मकान बनवाया था। इसका अगला हिस्सा दो मंजिल और पिछला तीन मंजिल का है। रमजान अली के आठ बेटे परिवार सहित इसी मकान में रहते और बुनकारी करते हैं। परिवार के मुताबिक, तेज बरसात में पिछले सप्ताह मकान का कुछ हिस्सा गिर गया था। इसके बाद सात भाई परिवार सहित दूसरी जगहों पर रहने चले गए थे। घर की देखभाल के लिए मो. यासीन अपनी पत्नी रुखाना बेगम के साथ यहीं रुका था। बुधवार की सुबह तेज आवाज के साथ मकान के आगे का हिस्सा अचानक भरभरा कर ढह गया। यासीन घर के बाहर थे, मलबे की चपेट में आकर चोटिल हुए। घर में मौजूद उनकी पत्नी रुखसाना बेगम मलबे में दब गईं। क्षेत्रीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और बचाव कार्य शुरू किया गया। मगर दो मंजिला मकान के मलबे में दबी महिला को खोज पाना आसान नहीं था। पुलिस की सूचना पर एनडीआरएफ की टीम पहुंची। कमांडेंट राणा संग्राम सिंह की अगुवाई में बचाव कार्य शुरू किया गया। लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद गंभीर रूप से जख्मी मगर जिंदा हाल में रुखसाना बेगम को मलबे से निकाल लिया गया। उन्हें मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मकान ढहने के कारण अगल-बगल के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

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