संगीत सोम के बयान से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं

ताजमहल पर गुस्साये आजम खान बोले- राष्ट्रपति भवन भी गिरा दो, योगी ने यूं संभाली बात मेरठ। सरधना संगीत सोम के विवादास्पद बयान पर विभिन्न दलों और नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। उनके इस बयान पर भाजपा ने जहां पल्ला झाड़ लिया है वहीं सभी ने इस पर अपनी-अपनी रायशुमारी करते हुए कहा है कि ताजमहल देश की धरोहर है। उधर, कई लोगों ने इस बयान को महज राजनीति स्टंट बताया है। गौरतलब है कि रविवार को मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में संगीत सोम ने कहा था कि बाबर, अकबर और औरंगजेब जैसे लोग महापुरुष नहीं गद्दार थे। इनका नाम इतिहास से हटाया जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों द्वारा बनाई गई इमारतों के नाम भी बदला जाएगा। ताजमहल को लेकर संगीत सोम के बयान से पैदा हुए विवाद में अब समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान भी कूद पड़े हैं. आज़म खान का कहना है कि राष्ट्रपति भवन को भी गिरा देना चाहिए क्योंकि अंग्रेज़ों का बनाया ये राष्ट्रपति भवन गुलामी का प्रतीक है. मैने ताजमहल के बारे में कुछ नहीं कहा है। ताजमहल तो हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। मैने तो केवल इतिहास के बारे में बात की है जो सही है। - ठा. संगीत सोम विधायक सरधना संगीत सोम का बयान उनका व्यक्तिगत बयान है। इससे भाजपा का कोई लेना देना नहीं है। लेकिन ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल है। इसे देखने के लिए लाखों पर्यटक हर साल विदेशों से भारत आते हैं। वैसे भी यह स्मारक अब पुरातत्व विभाग के संरक्षण में राष्ट्रीय धरोहर में शामिल है, जिसका किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है। वहीं ओवैसी को खबरों में रहने के लिए अनर्गल प्रलाप करने की आदत है। हर बात पर अव्यवहारिक और अमर्यादित प्रतिक्रिया देना उनका शगल है। - डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा संगीत सोम व ओवैशी को इतिहास की जानकारी नहीं है। दोनों विवादित बयानों से समाज में विद्वेष फैलाकर चुनाव जीतने का हथकंडा अपनाते हैं। ताजमहल देश की सांस्कृतिक धरोहर है और विश्व के आश्चर्यों में से एक हैं। संगीत सोम का बयान पार्टी की लाइन सबका साथ, सबका विकास से भी मेल नहीं खाता है। - केसी त्यागी, प्रधान महासचिव जेडीयू संगीत सोम व ओवैशी विवादित बयान देने के लिए एक्सपर्ट हैं। नेताओं को ऐसे बयानों पर नहीं देश और समाज के विकास पर ध्यान देना चाहिए। विवादित बयानों से कुछ समय के लिए चर्चा तो पाई जा सकती है, लेकिन इतिहास पुरुष नहीं बना जा सकता। - डॉ. राजकुमार सांगवान, पूर्व प्रदेश संगठन प्रभारी रालोद भाजपा गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम कर रही है, उसे मानवता वालों मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है। ताजमहल को सातवां अजूबा कहकर देश-विदेश से लोग आते हैं। इस तरह के बयान राजनीति चमकाने और लोगों में दरार डालने के लिए दिए जाते हैं। - राजपाल सिंह, सपा जिलाध्यक्ष भाजपा वाले रेलवे लाइन तो सही करा नहीं पाए और इतिहास की बात करते हैं। ये जन सुविधा की बात नहीं करते, बल्कि भावनाएं भड़काने की बात करते हैं, लेकिन अब जनता इन्हें पहचान चुकी है और इन्हें नकारना शुरू कर दिया है। - अब्दुल अलीम अलवी, सपा महानगर अध्यक्ष

निठारी कांडः सुरेंद्र कोली ने कहा 'जज साहब मैं पागल हूं', सामने से मिला ये जवाब

गाजियाबाद नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में सजायाफ्ता कैदी सुरेंद्र कोली ने सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की अदालत में मंगलवार को एक नई अर्जी दी, जिसमें उसने कहा कि ‘मैं पागल हूं। कार्य और अपराध की प्रवृति नहीं जानता था। लिहाजा मेरे विरुद्ध कार्रवाई पागलों (विक्षिप्त) के लिए नियत कार्रवाई के अनुसार होनी चाहिए’। वहीं सुनवाई के दौरान सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश ने उसकी इस अर्जी को खारिज कर दिया। मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 23 नवंबर की नियत की गई है। निठारी में हत्या व दुष्कर्म के कई मामलों में सुनवाई के लिए सजायाफ्ता कैदी सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर कड़ी सुरक्षा में सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश हुए। अदालत में सुरेंद्र कोली ने खुद बहस करते हुए एक बार फिर खुद को बीमार बताया। कोली ने कहा, मैं पागल हूं। साथ ही इस बार उसने बाएं हाथ के कंधे और बाजू में दर्द की बात अदालत को बताई। इससे पहले उसने दाएं हाथ के कंधे और बाजू में दर्द की शिकायत की थी। मामले में जिला कारागार के चीफ मेडिकल अफसर ने अदालत में पेश होकर उसके पूरी तरह स्वस्थ होने और बहाना बनाने के संबंध में स्पष्टीकरण दिया था। मालूम हो, कि 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले में पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे, जिसके बाद पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की अदालत में मंगलवार को सुरेंद्र कोली ने फिर से गवाहों को तलब करने और पुन: गवाही कराने की अर्जी भी दी। इस बार उसने मंजुला कृष्णन (आर्थिक सलाहकार व चेयरपर्सन मिनिस्ट्री ऑफ वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट), बलविंदर कुमार (सेक्रेट्री डिपार्टमेंट ऑफ वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट, यूपी सरकार), वीएन गौड (ज्वाइंट कमिश्नर, मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स), जेएस कोचर (डायरेक्टर, चाइल्ड अफेयर्स, मिनिस्ट्री ऑफ वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट), के. स्कंदन, डा. विनोद कुमार (एमडी, चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नोएडा), मूर्ति देवी, डा. संजीव (एसोसिएट डायरेक्टर, सीएफआइ, भोपाल), डा. ममता सूद (एसोसिएट प्रोफेसर, एम्स), चंद्रशेखर (मेट्रो पॉलिटियन, मजिस्ट्रेट, पटियाला) की दोबारा से गवाही की अर्जी दी है। इस दौरान अदालत में कोली ने बहस भी की।

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