अखिलेश यादव कन्नौज से तो नेताजी मैनपुरी से लड़ेंगे 2019 का लोकसभा चुनाव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि वह आने वाले लोकसभा चुनाव में कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं उनके पिता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे। जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर सोमवार को लखनऊ के लोहिया ट्रस्ट में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ये बात कही। गौरतलब है कि कन्नौज सीट से वर्तमान में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं। डिंपल से पहले इस सीट पर समाजवादी पार्टी के जाने-माने नेता जनेश्वर मिश्र चुनाव लड़ते थे।अखिलेश यादव ने मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा कि कन्नौज जनेश्वर मिश्र जी की सीट रही है। इसलिए मैं चाहता हूं कि मुझे भी वहीं से लड़ने का मौका मिले। बता दें कि कन्नौज और मैनपुरी समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। कन्नौज में विधानभा की तीन सीटें हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा यूपी की 80 सीटों में से सिर्फ पांच सीटों पर ही जीत पाई थी। जीतने वालों में मुलायम सिंह और उनके परिवार के लोग ही शामिल थे। हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में भी अखिलेश ने कन्नौज और फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की थी। बाद में फिरोजाबाद सीट छोड़ दी थी। इस सीट पर पति की कामयाबी दोहराने के लिए डिंपल यादव ने चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बब्बर ने मात दी थी। 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश ने कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. बाद में डिंपल यहा से नि‌र्विरोध जीत गईं थीं।

बालिका के मस्तिष्क की जटिल सर्जरी की

अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों के एक दल ने छह वर्ष की बालिका के मस्तिष्क की जटिल सर्जरी की है। यह सर्जरी न्यूरो सर्जरी विभाग में असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉक्टर रमन शर्मा द्वारा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीके श्रीवास्तव व एसोसिएट प्रोफेसर फखरूल हुदा की देखरेख में की गई।विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीके श्रीवास्तव ने बताया कि छह वर्षीय बालिका इकरा जो कि ब्रेनस्टेम ग्लायोमा (मस्तिष्क गांठ) के कारण चेहरे की विषमता तथा मुख से थूक निरन्तर आने के कारण कठिन समस्या का सामना कर रही थी को परीक्षण के बाद उसका सीटी स्केन कराया गया जिसमें उसके मस्तिष्क में ब्रेन के पास एक गांठ को पाया गया। चिकित्सकों ने लगभग चार घंटे के लम्बे आपरेशन के बाद इस गांठ को सफलता पूर्वक बाहर निकाल लिया।उन्होंने बताया कि आपरेशन के बाद बालिका को वेंटीलेटर की भी आवश्यकता नहीं पड़ी हालांकि इस प्रकार की जटिल सर्जरी में रोगी को आपरेशन के बाद वेंटीलेटर की आवश्यकता पड़ती है और अक्सर उसकी जान भी चली जाती है। उन्होंने बताया कि रोगी को आपरेशन के बाद रेडियोथेरोपी दी जा रही है जिसके बाद उसे अस्पताल से डिसचार्ज कर दिया जाएगा।प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रेन स्टेम ग्लायोमा के रोगी को पलक झपने में कठिनाई के अलावा तिरछा देखने में कठिनाई होती है। इसके अलावा मरीज को घुटनों व एड़ियों में कमजोरी होने के कारण उसको चलने में भी परेशानी होती है और वह खाने को भी ठीक प्रकार से नहीं निगल पाता।इस आपरेशन में जेएन मेडीकल कॉलेज की एनेसथीसियालोजी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर शहला हलीम और असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉक्टर उबैद अहमद सिद्दीकी के अलावा सिस्टर लिलि, सलमान और हैदर का सहयोग रहा।मेडीकल कालेज के प्रिन्सिपल एवं सीएमएस प्रोफेसर तारिक मंसर ने इस सफल सर्जरी पर चिकित्सादल के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि अब जेएन मेडीकल कॉलेज में ही रोगियों को मस्तिष्क की जटिल सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और उन्हें इसके लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।

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