पतंजलि फूड फैक्टरी से मिले हथियार, जांच में जुटी एसटीएफ

हरिद्वार, पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क परिसर में सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने पत्थर से भरे बोरे, फरसे, हेलमेट, तलवार, डंडे आदि बरामद किए हैं। सभी सामान को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। तीन दिन पहले फैक्ट्री परिसर के बाहर हिंसक झड़प में ट्रक मालिक की मौत हो गई थी। जबकि एक के पैर में गोली और नौ लोग घायल हो गए थे। एसएसपी के नेतृत्व में हादसे के दौरान चलाए गए सर्च अभियान में भी हथियार बरामद किए गए थे। सीओ सदर राजेश भट्ट ने बताया कि धारा 165 आईपीसी के तहत नोटिस जारी कर फैक्ट्री परिसर में शुक्रवार को सर्च अभियान चलाया गया था। बताया कि अभियान में फैक्ट्री की छतों में पत्थर से भरे बोरे पाए गए हैं। ऐसे डंडे भी बरामद किए गए हैं जिनके आगे धारदार हथियार लगाए गए हैं। हेलमेट के साथ ही हाथ से पकड़ने वाले बचाव उपकरण भी कब्जे में लिए गए हैं। बताया कि सर्च अभियान अभी जारी रहेगा। पतंजलि फूड पार्क और ट्रक यूनियन विवाद में देहरादून से एसटीएफ ने आकर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी के साथ ही कंप्यूटर भी कब्जे में ले लिए गए हैं। उधर, पतंजलि हर्बल फूड पार्क की ओर से नरेश झा ने ट्रक यूनियन अध्यक्ष धमेंद्र चौहान सहित 90 लोगों के खिलाफ हथियारों से लैस होकर गाडरें के साथ मारपीट, तोड़फोड़ कर जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया है। शुक्रवार को जांच टीम ने फैक्ट्री परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर एवं सीपीयू कब्जे में ले लिया। दोपहर में एसटीएफ देहरादून की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। मानव संसाधन विभाग पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड के सहायक प्रबंधक नरेश झा ने पथरी थाने में ट्रक यूनियन अध्यक्ष धमेंद्र चौहान, बलबीर उर्फ बलविंद्र सिंह, बलजीत समेत 90 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पथरी थाने के प्रभारी अमरजीत सिंह ने मामला दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क में हुए खूनी संघर्ष के बाद हत्या, जानलेवा हमला, षडय़ंत्र रचने के मामले में रामभरत समेत आठ आरोपियों की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। रामभरत को बुधवार रात को ही जेएम के सामने पेश करने पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। शुक्रवार को पथरी पुलिस ने मामले में आरोपित सात लोगों को कोर्ट में पेश किया। जबकि रामभरत को बुधवार रात ही जेल भेज दिया गया था। फूड पार्क में हुई हिंसा में ट्रक यूनियन के उपाध्यक्ष दलजीत सिंह की मौत हो गई थी। हमले में अन्य बारह लोग घायल हो गए थे। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता उत्तम सिंह चौहान ने यूनियन सदस्यों और पुलिस पर सभी आरोपियों को निर्दोष और झूठा फंसाने की दलील दी। द्वितीय जेएम संदीप भंडारी ने आरोपी रामभरत निवासी, भजनलाल, राजेन्द्र, रविन्द्र, अविनाश, राजेश, जीवन और अरूण की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने रामभरत को निर्दोष बताया है। कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। अगर पुलिस 15 अप्रैल को दर्ज रिपोर्ट पर कार्रवाई कर लेती तो यह हादसा नहीं होता। ऐसा लग रहा था कि उत्तराखंड पुलिस को किसी बड़े हादसे का इंतजार था। प्रबंधन द्वारा मीडिया को जारी लिखित बयान में बताया गया है कि ट्रक यूनियन गुंडागर्दी करके मनमाने रेट पर ट्रक लगवाना चाहती थी। उनका हौसला इतना बुलंद था कि आए दिन वह फैक्ट्री में घुसकर धमकी देते रहते थे। पुलिस को इसकी सूचना समय रहते दे दी गई थी। यूनियन के सदस्य जबरन फैक्ट्री के ट्रकों को रोक रहे थे। कई बार फैक्ट्री के ट्रक चालकों के साथ मारपीट की गई। पतंजलि परिवहन प्रा.लि के प्रबंधक योगेश कुमार ने पुलिस में पंद्रह अप्रैल को मामला दर्ज कराया था कि ट्रक यूनियन के लोग फैक्ट्री में घुसकर मारपीट कर वॉकी-टॉकी और मेटल डिटेक्टर उठा कर ले गए। हमले में पार्क के छह कर्मचारी घायल हुए थे। बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की जिससे ट्रक यूनियन के हौंसले बुलंद हो गए। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि फैक्ट्री के एमडी रामभरत निर्दोष हैं उन्हें गलत फंसाया गया है। राज्य में कांग्रेस की सरकार है और खुलेआम कांग्रेसी कार्यकर्ता हमें धमकी देते हुए कह रहे हैं कि बाबा रामदेव ने चुनाव में जो कुछ कांग्रेस के साथ किया, उसका भुगतान तो करना ही होगा। उत्तराखंड की राज्य सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन कर रही है। आचार्य ने कहा कि पतंजलि फूड पार्क में 20 से 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। पतंजलि फूड पार्क प्रबंधन ने पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कंपनी को बदनाम करने का आरोप लगाया है। साथ ही कंपनी के उत्पादों में मिलावट करने का शक जताते हुए एक पत्र केंद्रीय गृह मंत्री को भेजा है। पतंजलि हर्बल फूड पार्क पदार्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश शर्मा ने देर रात प्रेस नोट जारी कर कहा कि स्थानीय पुलिस प्रशासन राज्य सरकार के इशारे पर लगातार षड्यंत्र रच रही है। पहले एक पक्षीय कार्रवाई कर कंपनी के निर्दोष लोगों को जेल भेजा। अब अवैध तरीके से फैक्ट्री बंद कर हजारों स्थानीय लोगों को बेरोजगार करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। शुक्रवार को फैक्ट्री को तलाशी के नाम पर बंद कर दिया गया। कहा कि फूडपार्क परिसर के अंदर अवैध हथियार और अन्य अवैध सामग्री रखकर बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक पार्टी के इशारे पर फूड पार्क में बनने वाली खाद्य सामग्री में कुछ मिलाने की आशंका है। इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिख दिया गया है। शुक्रवार को तलाशी के दौरान कंपनी प्रबंधन की ओर से कंपनी के प्रतिनिधि को साथ रखने की अपील की गई थी। लेकिन, पुलिस ने एक तरफा कार्रवाई की है। पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई से साफ है कि पुलिस पक्षपात पूर्ण कार्यवाई करके पतंजलि को बदनाम करने का षड्यंत्र कर रही है। कंपनी प्रबंधन के लाइसेंसी हथियारों को अवैध बताकर बदनाम करने की कोशिशें की जा रही है। हादसे के तीसरे दिन बड़ी तादात में कर्मचारी सुबह फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर पहुंचे। तभी ग्रामीण भी काफी संख्या में वहां आ गए। उन्होंने कर्मचारियों का विरोध करना शुरू कर दिया। मौके की नजाकत और सर्च नोटिस के कारण पुलिस ने कर्मचारियों को वापस घरों को भेज दिया। हालांकि फैक्ट्री में काम करने वाली महिला कामगारों की संख्या भी बहुत है लेकिन वह काम पर नहीं आ रही हैं। ग्रामीणों के तेवरों को देखते हुए कर्मचारी कुछ देर बाद लौट गए। दो दिन से फैक्ट्री के प्रवेश द्वार पर पुलिस की ही तैनाती नजर आ रही है। कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ ने ज्वालापुर में बैठक कर बाबा रामदेव के पतंजलि फूड पार्क पदार्था की हिंसक घटना में ट्रांसपोर्टर दलजीत सिंह की हत्या की कड़ी निंदा की। प्रकोष्ठ अध्यक्ष अनिल कपूर ने कहा कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण घटना की जिम्मेदारी लेने की बजाय उल्टे सीधी बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे जनता में रोष फैल रहा है। इस दौरान दीपक कुमार, प्रवेश कुमार, मुकेश कुमार, विकास कुमार, संजय कुमार, सतीश शर्मा, अनीता वर्मा, रमेश छाछर, सुरेंद्र तेश्वर, अनिल सिन्हा, कल्पना सिन्हा, आदि उपस्थित थे।

त्तराखंड संकट पर HC की टिप्‍पणी- ताकत किसी को भी भ्रष्‍ट कर सकती है, राष्‍ट्रपति भी हो सकते हैं गलत -

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति के फैसले पर भी सवाल उठाए। याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि पूर्ण शक्ति किसी को भी भ्रष्ट कर सकती है और राष्ट्रपति भी गलत हो सकते हैं। इससे पहले मंगलवार (19 अप्रैल) को हाईकोर्ट ने केंद्र को आड़े हाथ लेते हुए कहा था कि राष्ट्रपति शासन लगाकर वह निर्वाचित सरकारों के अधिकार हड़प रहा है और अराजकता फैला रहा है तथा विधानसभा में ‘शक्ति परीक्षण की शुचिता को समाप्त नहीं किया जा सकता।’ अदालत की पीठ इस बात पर कायम रही कि खरीद फरोख्त एवं भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद बहुमत के परीक्षण का एकमात्र संवैधानिक तरीका सदन में शक्ति परीक्षण है ‘जो अभी किया जाना शेष है मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वी के बिष्ट की पीठ ने कहा कि यह (राष्ट्रपति शासन) केवल असामान्य मामलों में ही लागू किया जा सकता है। राष्ट्रपति 28 मार्च के बाद उत्पन्न होने वाली स्थितियों की प्रतीक्षा कर सकते थे जब सदन में शक्ति परीक्षण होना था। राष्ट्रपति शासन लगाकर आप (केन्द्र) निर्वाचित सरकार के अधिकार ले रही है। आप अराजकता फैला रहे हैं।  कोर्ट ने कहा कि खरीद फरोख्त के आरोपों तथा सरकार में भ्रष्टाचार को इंगित करने वाले स्टिंग ऑपरेशन के बावजूद बहुमत साबित का एकमात्र तरीका सदन में शक्ति परीक्षण है। यह किया जाना अभी बाकी है। स्टिंग ऑपरेशन ओर उससे निकाले गये निष्कर्ष पूरी तरह से अप्रासंगिक हैं। केन्द्रीय कैबिनेट इस बात को नहीं जान सकता था कि विधानसभा अध्यक्ष 26 मार्च को नौ विधायकों को निलंबित कर देंगे। 

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