सरकार 3 रिव्यू: अकेले राम गोपाल वर्मा ले डूबे सबको

राम गोपाल वर्मा के गैर संजीदा ट्विट्स ने उनके बारे में लोगों के बीच एक सस्ती सी राय बना दी है. उनके निर्देशन में बनी 'सरकार 3' देखने के बाद रामगोपाल वर्मा की निजी शख्सियत को समझने में थोड़ी और आसानी होगी. 'सरकार 3' पहले की दोनों फ्रेंचाइजी के मुकाबले थोड़ी कमजोर नजर आती है क्योंकि इस फिल्म में काफी कुछ पहले के मुकाबले बदला हुआ है, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव सरकार बने अमिताभ बच्चन की आवाज है. बिग बी ने अपनी आवाज का गियर इससे पहले 'अग्निपथ' के लिए बदला था और वो अनुभव किसी के लिए सुखद साबित नहीं हुआ शायद फिल्म की चार रीलों के बाद बिग बी और रामू दोनों को ये बातें समझ में आ गयी और बच्चन साहब अपनी आवाज में वापस लौट आए. 'सरकार 3' में सबसे बड़ा बदलाव ये आया कि अब सुभाष नागरे हथियार भी उठा लेता है जबकि पहले उनकी जुबान ही हथियार से ज्यादा खतरनाक दिखाई देती थी. इन बदलावों के बीच जो कुछ नहीं बदला वो है फिल्म पर निर्देशक की पकड़. पूरी फिल्म पर निर्देशक की जबरदस्त पकड़ दिखाई देती है. चुस्त एडिटिंग ने उनका काम और आसान कर दिया है. कहानी की बात करें तो ये इसका सबसे कमजोर पहलू है. रहस्य रोमांच से भरी इस कहानी में किरदारों का मसखरापन फिल्म की संजीदगी को कम कर देता है. कहानी के नाम पर फिल्म में जो कुछ है वो ये है कि सरकार का पोता शिवाजी नागरे वापसी करता है और सरकार के काम करने के स्टाइल पर पैनी नजर रखता है.

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