अहमदाबाद में शाहरुख की कार पर पथराव

हमलावरों ने की हाय-हाय की नारेबाजी भी
नई दिल्ली: अभिनेता शाहरुख खान की गाड़ी पर पत्थरबाजी की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार तड़के गुजरात के अहमदाबाद में शाहरुख खान की कार पर पथराव किया गया। बताया जा रहा है कि शाहरुख फिल्म रईस की शूटिंग के लिये यहां पहुंचे थे। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि होटल की पार्किंग में खड़ी शाहरुख की कार पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थराव किया। शाहरुख खान पथराव के वक्त कार में मौजूद नहीं थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि शाहरुख खान की आगामी फिल्म रईस की कहानी गुजरात के कुख्यात डॉन रहे अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित है। घटना के वक्‍त कार में शाहरुख खान मौजूद नहीं थे। शाहरुख शूटिंग के सिलसिले में यहां एक होटल में ठहरे हुए हैं। पत्थरबाजी से कार को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद शाहरुख ने अपने लिए नई कार मंगवाई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मामले की जांच शुरू कर दी है। कुछ दिनों पहले भी गुजरात में शाहरुख का विरोध हुआ था। शाहरुख खान उस वक्‍त आलोचनाओं का शिकार हो गए थे, जब उन्‍होंने देश में कथित तौर पर असहिष्णुता बढ़ने के विरोध में साहित्‍यकारों द्वारा अवॉर्ड वापस किए जाने का समर्थन किया था। विवाद इतना बढ़ गया कि इसका असर उनकी फिल्‍म दिलवाले पर भी पड़ा। कई संगठनों ने उनकी फिल्‍म का बायकॉट करने का आह्वान किया। बाद में शाहरुख ने अपने बयान के लिए माफी भी मांगी, इसके बाद, राजनीतिक मामलों पर बयान देने से बचते नजर आए।

जानदार, जबरदस्त 'मांझीः द माउंटेन मैन'

 नई दिल्ली बॉलीवुड में कम ही ऐसे डायरेक्टर हैं जो बायोपिक्स को हाथ लगाते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से यह ट्रेंड बढ़ा है. लेकिन केतन मेहता ऐसा नाम हैं जो इस कला में महारत रखते हैं और लंबे समय से इस जॉनर में खेलते आए हैं. फिर चाहे 'सरदार' हो 'मंगल पांडे' हो या 'रंग रसिया' या फिर 'मांझीः द माउंटेन मैन'. वह फिल्मों के लिए अच्छी रिसर्च करते हैं और उसमें नाटकीयता का भी अच्छा पुट डालते हैं. ऐसा ही 'मांझी' के बारे में भी है. फिल्म बायोपिक होते हुए भी ड्रामे और कई तरह के उतार-चढ़ाव भरी है. दशरथ के किरदार में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सिद्ध कर दिया है कि वह इस दौर के शानदार कलाकार है. वह किरदार में इस तरह घुस जाते हैं कि पूरी तरह असल दशरथ मांझी जैसे ही लगते हैं. केतन ने बायोपिक को प्रेम, संघर्ष, तत्कालीन समाज का ताना-बाना बुनकर दिलचस्प बनाने की कोशिश की है.
दशरथ (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) किशोरावस्था में ही अपने गांव गहलौर से भाग जाता है और जवान होने पर लौटता है. उस समय तक सरकारी तौर पर अस्पृश्यता खत्म हो चुकी होती है और सब बराबर की बात हो रही होती है. लेकिन वह अपने गांव में ठीक इसके उलट ही पाता है. फिर उसकी जिंदगी में पत्नी फगुनिया (राधिका आप्टे) कदम रखती है और सब कुछ बदल जाता है. दोनों का प्रेम काफी गाढ़ा हो जाता है. लेकिन एक दिन फगुनिया के साथ हादसा होता है और दशरथ की जिंदगी बदल जाती है. बस वहीं से वह पहाड़ का सीना चीरकर सड़क बनाने का फैसला कर लेता है. केतन ने कहानी में रुतबे वालों का गरीबों या दलितों का शोषण, प्रेम अगन, व्यवस्था पर प्रहार या फिर संघर्ष सबको पेश किया है. हालांकि दशरथ के प्रेम का इजहार थोड़ा ज्यादा रहता है. वह थोड़ा कम हो सकता था.

София plus.google.com/102831918332158008841 EMSIEN-3