साइंटिफिक तरीके से ही बिमारियों का ईलाज संभव है

साइंटिफिक तरीके से ही बिमारियों का ईलाज संभव है
हर साल दिल्ली जैसे शहरों में न जाने कितने ही लोग छोटी छोटी सावधानिया न बरतने की वजह से बड़ी बड़ी मुसीबते मोल ले लेते है यहा तक की कई बार तो उनको अपनी जान तक भी गवानी पड़ जाती है । दिल्ली की एक बड़ी आबादी जो कम सुविधाओ के साथ अपना जीवन व्यतीत करती है के लिये ज़रूरी है कि वो अपनी जिंदिगी में होने वाले छोटे छोटे परिवर्तन को किसी भी स्थिति में नज़रंदाज़ न करे । एक आम आदमी की छोटी सी सावधानी भी कई लोगो की जान खतरे में डालने से बचा सकती है । दिल्ली में डेंगू , मलेरिया आदि ऐसी बीमारिया है जिसमे अगर थोड़ी भी सावधानी बरती जाये तो इनसे छुटकारा आसानी से पाया जा सकता है ।

इन सब मुद्दों पर दिल्ली की जानी- मानी डॉक्टर मालती गोयल से आवाम ए हिन्द के पत्रकार जावेद छोलसी की एक खास बात चीत --
सवाल – दिल्ली में हर साल न जाने कितने ही लोग डेंगू व मलेरिया जैसी बिमारियों के कारण अपनी जान गवा देते है इसपर आपकी क्या राय है ?
जवाब - सरकार हर साल डेंगू , मलेरिया जैसी बिमारियो के बारे में लोगो में जागरूकता फेलाने के लिये लाखो रूपये खर्च करती है । इन सब के बावजूद भी लोग इसको सीरियस होकर नहीं लेते । आज भी अगर आप दिल्ली वालो के घरो में जाकर देखे तो आपको मालूम हो जायेगा कि आखिर डेंगू मच्छर इतनी आसानी से कैसे अपने पैर फैला लेता है । दिल्ली के हर दुसरे घर में आपको पानी से भरी टंकिया खुली हुई मिलेंगी । इस तरफ दिल्ली की दस प्रतिशत जनता भी ध्यान नहीं देती जिसके नतीजे हर साल कई लोगो को अपनी जान देकर चुकाने पढ़ते है । इस साल अभी तक दिल्ली में डेंगू के कई मामले तकरीबन तीस सामने आ चुके है और मलेरिया और दूसरी मच्छर जनित बिमारियो की तो कोई गिनती ही नहीं ।
सवाल – हमारे देश की बड़ी आबादी आज भी पढ़ी लिखी नहीं है यही वजह है कि वे इन चीजों पर कोई ध्यान नहीं देते इस पर आपकी क्या राय है ?
जवाब – बात पढ़े लिखे या अनपढ़ की नहीं है यहा बात है कि आप अपने आप को और अपने आस पास के लोगो के बारे में कितना ध्यान देते है । कल ही मैंने अख़बार में पढ़ा की अब तक तीस से अधिक केस दिल्ली में डेंगू के आ चुके है और इनमे अधिकतर मामले पढ़े लिखे लोगो के साथ पेश आये है । ये सब चीज़े निर्भर करती है कि आप किस चीज़ को कितनी सीरियस तरीके से लेते है । सरकारी लोग घर घर जाकर इस बात को समझाते है कि इन बिमारियो से कैसे बचा जा सकता है उसके बावजूद भी अगर लोग नहीं समझेगे तो इसमें किसकी गलती मानी जाएगी । दुसरे अगर लोग अपनी सुरक्षा को लेकर संगीन नहीं होंगे तो सरकार की तरफ से किया गया प्रयास कामयाब नहीं हो सकता । इन सब मामलो में लोगो की भागीदारी होना बहुत ज़रूरी है ।
सवाल – लाख कोशिशो के बावजूद भी हर साल कई लोगो की मच्छर जनित बिमारीयों से मौत हो जाती है इसको आप किस नज़रिये से देखती है ?
जवाब – देखिये मेरा कुछ अलग नज़रिया नहीं है , बस में इतना ज़रूर कहना चाहुगी कि डेंगू बुखार कोई ऐसी बिमारी नहीं है कि आज मच्छर ने आपको काठा और कल आपकी जान खतरे में पड़ गई । डेंगू के होने से पहले कुछ लक्षण होते है जिसको कोई भी काबिल डॉक्टर आसानी से समझ जाता है और अगर मरीज़ ऐसे डॉक्टर के पास चला जाता है जिसका डॉक्टरी से कोई मतलब ही नहीं तो उसका मामला बिगड़ता चला जाता है और मरीज को अपनी जान तक गवानी पड़ जाती है ।
सवाल – डॉक्टर का डॉक्टरी से कोई मतलब नहीं आपका इशारा झोला छाप डॉक्टरो की तरफ है क्या ?
जवाब – मेरा इशारा उन डॉक्टरो की तरफ है जो अपने पेशे के साथ न्याय नहीं करते इसमें झोला छाप डॉक्टरो के अलावा कुछ पड़े लिखे डॉक्टर भी आते है जो मरीजों का इलाज बिलकुल भी सीरियस होकर नहीं करते है ।
सवाल – मरीज़ को ऐसे मामले में क्या सावधानी बरतनी चाहिये ?
जवाब – अगर कोई किसी भी बीमारी से ग्रसित है तो उसे व उसके परिजनों के लिये बेहत ज़रूरी है कि वो ये ध्यान रखे कि मरीज़ का इलाज साइंटिफिक तरीके से हो रहा है या नहीं । साइंटिफिक तरीके का मतलब ये है कि मरीज़ के इलाज से पहले ज़रूरी चेक अप किये गये है या नहीं । मेरी ज़ाती राय तो ये है कि किसी भी व्यक्ति को अगर किसी भी तरह की कोई बीमारी होने का शक हो तो शुरुआत में ही ब्लड चेक ज़रूर कराये तब आगे की कार्येवाही करे । अगर किसी को डेंगू का शक है तो अपना प्लेटलेट्स व टी एल सी लगातार चेक कराये ।
सवाल – आम बिमारीया जैसे बुखार आदि से बचने के लिये आप आम लोगो को क्या संदेश देना चाहेगी ?
जवाब – अधिकतर छोटी मोटी बिमारीयों को थोड़ी सी सावधानी के साथ टाला जा सकता है । डेंगू और मालेरिया जैसी बिमारीयों के लिये ज़रूरी है कि उनको होने ही न दिया जाये और इसके लिये ज़रूरी है कि आप अपने घर के साथ साथ आस पास के इलाको को भी पूरी तरह साफ सुथरा रखने में पूरा सहयोग दे । दुसरे अधिकतर बीमारिया खाने पीने पर निर्भर करती है , स्वस्थ रहने के लिये ज़रूरी है कि अच्छा खाये और कम खाये और शारीरिक मेहनत ज़रूर करे चाहे वो हेल्थ क्लब जाकर करे या पैदल वाक कर के करे । अगर किसी को किसी तरह के बीमार होने का शक है तो वो लापरवाही बिलकुल न करे क्योकि छोटी छोटी चीज़े ही बड़ी बनती चली जाती है । अगर किसी भी तरह की बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ लिया जाये तो उसका इलाज करना बहुत आसन हो जाता है ।

रोज घर में इस्तेमाल होने वाली चीजों में है छिपा कैंसर

नई दिल्ली ।  क्या आपको पता है, आपके घरों में इस्तेमाल होने वाले वाली जरूरी चीजों में कैंसर की वजहें छुपी हो सकती हैं। इसमें कीटनाशक से लेकर लेकर कम मात्रा में इस्तेमाल होने वालीं दवाइयां भी शामिल हो सकती हैं।28 देशों के 174 वैज्ञानिक हाल ही में हुए एक शोध के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस दल में भारतीय वैज्ञानिक भी थे। इन्होंने घरों में रोज इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स के रिऐक्शन पर शोध किया था। इस शोध के मुताबिक इन सब केमिकल्स के संयुक्त प्रभाव से भविष्य में कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।अभी तक घर में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से कैंसर होने पर शोध नहीं किया गया था। ताजा शोध से इन केमिकल्स के कारसिनजन (कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ) होने का पता चला है।इस शोध में 85 केमिकल्स को शामिल किया गया था। वैज्ञानिकों ने इन केमिकल्स के प्रभाव और उन 11 लक्षणों के बीच संबंध ढूंढने की कोशिश की, जो कैंसर की पहचान बताते हैं। इसमें से 50 केमिकल्स ऐसे पाए गए जो कैंसर के शुरुआती चरण की वजह बन सकते हैं। 13 केमिकल्स ऐसे पाए गए, जो बाकी केमिकल्स के मुकाबले किसी को तेजी से कैंसर की ओर धकेल सकते हैं। 22 केमिकल्स में ऐसे कोई लक्षण नहीं पाए गए, जो कैंसर को न्योता देते हों।खतरनाक केमिकल्स या चीजों में कीटनाशक, फंगसनाशक, पेस्टीसाइड, फूड कंटेनर, वॉटर बॉटल्स, हाथ धोने वाले केमिकल्स, कॉस्मेटिक, मिरगी के इलाज की दवाई, सिरदर्द, गठिया और बुखार की दवाई, पेंट, निर्माण सामग्री, एयरक्राफ्ट, वॉशिंग पाउडर जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें हैं।लंदन की ब्रूनेल यूनिवर्सिटी के प्रफेसर हम्माद यसाई ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस शोध का मकसद रोजाना इस्तेमाल में आने वाले केमिकल्स की वजह से कैंसर के आशंकित खतरे को पहचानना था। उन्होंने कहा कि ये केमिकल्स शरीर में पहुंच जाने पर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।हालांकि, उन्होंने साफ किया, 'हम यह दावा नहीं कर रहे कि ऊपर बताई गई चीजों से कैंसर होता है। हमने यह परिकल्पना की है कि अगर यह केमिकल्स मानव शरीर में पहुंचे तो इनसे कैंसर की शुरुआत हो सकती है।'आपको बता दें कि अभी तक प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले BPA या टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाले ट्राइकलसन जैसे केमिकल्स से होने वाले दूसरे नुकसानों के बारे में ही जानकारी थी। इनसे कैंसर के आशंकित खतरे की बात सुनना, कई लोगों के लिए चौंकाने वाला मामला है।

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