इंग्लैंड के बाद अब साउथ अफ्रीका के लिए खेल सकते हैं केविन पीटरसन

नई दिल्ली इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने खुलासा किया है कि वो दक्षिण अफ्रीका की तरफ से खेलने के लिए तैयार हैं. पीटरसन का इंग्लैंड एंड वेल्स (ईसीबी) से कई बार विवाद हुआ है. 2013-14 एशेज सीरीज में इंग्लैंड की हार के बाद पीटरसन को राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया गया था. 37 साल के केविन पीटरसन साल 2019 में वर्ल्ड कप के पहले दक्षिण अफ्रीका की ओर से खेलने के योग्य हो जाएंगे. बहरहाल, दक्षिण अफ्रीका की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए उनका विकल्प अभी भी खुला है, लेकिन तब तक वह 40 साल के हो जाएंगे. पीटरसन अपने देश में वापस लौट आए हैं जहां वह अपने परिवार के लिए नया आलीशान लॉज बनवा रहे हैं. पीटरसन ने आगे कहा, 'इंग्लैंड में अगले साल खेलना मुश्किल होगा क्योंकि अफ्रीका में मेरा परिवार है और इस समय में यहां रहने में मुझे अच्छा लग रहा है. मैं अगले वर्ष इंग्लैंड में नहीं रहूंगा. मुझे नहीं लगता कि 39 की उम्र होने पर मैं इंग्लैंड की गर्मी में खेल सकूंगा.' पीटरसन पिछले दिनों जानवरों के अधिकारों के संबंध में कैंपेनिंग करने में खासे व्यस्त रहे थे, खासतौर पर उन्होंने अफ्रीका में गैंडों की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया था. एक क्रिकेट वेबसाइट के हवाले से पीटरसन ने कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका के लिए अगले दो सालों में बहुत क्रिकेट खेलेंगे. और वह तब तक खेलते रहेंगे जब वह इसका आनंद लेंगे. पीटरसन ने कहा, “मैं अगले दो सालों में दक्षिण अफ्रीका में बहुत क्रिकेट खेलने वाला हूं, इसलिए हम देखेंगे. मुझे बैटिंग करना पसंद है. मैं तबतक बैटिंग करूंगा जब तक मुझे बैटिंग की कला रास आती रहेगी. अब मैं बूढा हो चुका हूं. मेरी पिंडली में चोट लगी है मैं फील्डिंग नहीं कर पाया. बुधवार को पीटरसन ने सरे की ओर से खेलते हुए 35 गेंदों में 52 रन बनाए जिसमें चार छक्के शामिल थे. यह उनका पिछले दो सालों में पहला इंग्लिश घरेलू मैच था. पीटरसन ने ट्वीट करते हुए लिखा,”शुक्रिया, अंतिम बार इंग्लैंड में खेलने को लेकर बहुत उत्साहित हूं." दक्षिण अफ्रीका 2019 का विश्व कप जीतने के लिए लालायित है, क्योंकि उन्होंने अभी तक एक भी वर्ल्ड कप नहीं जीता है. अगर पीटरसन उनकी टीम में शामिल हो जाते हैं, तो वे बेहद मजबूत हो जाएंगे.

सचिन, गांगुली व लक्ष्मण की बेइज्जती, जब चयन खुद ही करना था तो सीएसी क्यों बनाई

नई दिल्ली। पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने अपने आखिरी कार्यकाल में विवादों से बचने के लिए टीम इंडिया का मुख्य कोच चुनने के लिए सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) का गठन किया था, लेकिन पिछले दो कोच और सहयोगी स्टाफ के चयन में जितना विवाद हुआ, शायद इससे पहले कभी नहीं हुआ। पिछली बार जब सीएसी ने पूर्व टीम निदेशक रवि शास्त्री पर अनिल कुंबले को वरीयता देते हुए मुख्य कोच चुना तब भी भारी बवाल मचा। शास्त्री और गांगुली ने एक-दूसरे के खिलाफ बयान भी दिए। कुंबले और कप्तान कोहली की साल भर भी नहीं बनी और पिछले महीने चैंपियंस ट्रॉफी के बाद मुख्य कोच ने इस्तीफा दे दिया। कुंबले का करार एक वर्ष का ही था और इससे पहले ही सीएसी को नया कोच चुनने की जिम्मेदारी दी जा चुकी थी। वेस्टइंडीज दौरे से पहले सीएसी ने कुंबले को कोच चुन भी लिया था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देना मुनासिब समझा। इसके बाद नए कोच के लिए फिर से आवेदन मंगाए गए। इस बीच बोर्ड के पदाधिकारी भी शास्त्री को दोबारा कुर्सी दिलाने के लिए सक्रिय हो चुके थे। कुंबले के इस्तीफा देने के बाद वह भी मैदान में कूद गए। लंदन में बैठक करने के बाद सीएसी की मुंबई में बैठक हुई। सीएसी के दो सदस्य वीरेंद्र सहवाग के पक्ष में, तो एक शास्त्री के पक्ष में थे। बोर्ड के कुछ सदस्य और कप्तान भी शास्त्री के पक्ष में थे। इसके बावजूद सीएसी शास्त्री के नाम पर सहमत नहीं हो पाई। सीएसी को ही कोच चुनने की पूरी पावर देने की बात कहने वाली बीसीसीआई व सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) किसी न किसी तरीके से चयन में दखल देती रही।सीईओ राहुल जौहरी को कप्तान व बाकी टीम से कोच पर राय लेने के लिए वेस्टइंडीज भेजा गया। यही नहीं आवेदकों के साक्षात्कार होने के बाद जब गांगुली ने फैसला लेने से पहले कप्तान से बात करने की बात कही तो सीओए ने उन्हें जल्द से जल्द निर्णय लेने का आदेश दे दिया। जो सीओए कह रहा था कि सीएसी मुख्य कोच पर जल्द फैसला ले, क्योंकि इसको टालने से बीसीसीआई की बदनामी हो हो रही है, उसी सीओए ने सीएसी के जहीर को गेंदबाजी व द्रविड़ को बल्लेबाजी सलाहकार चुनने के फैसले को ही शनिवार को टाल दिया। सीओए को बताना चाहिए कि जिस सीएसी को आप सर्वेसर्वा बता रहे थे उसके फैसले को टालने से क्या अब क्रिकेट की बेइज्जती नहीं हो रही। यही नहीं सीओए ने सहयोगी स्टाफ और सलाहकारों पर फैसला लेने के लिए एक समिति का गठन कर दिया। यह समिति कोच रवि शास्त्री से भी सलाह लेगी। जब मुख्य कोच का चयन टीम इंडिया के कप्तान की पसंद का और सहयोगी स्टाफ मुख्य कोच की पसंद का ही रखना था तो फिर दो महीने तक ड्रामा क्यों किया गया? फिर सीएसी को यह जिम्मेदारी ही क्यों दी गई? सीएसी में शामिल तीन दिग्गजों की बेइज्जती क्यों की गई? अब बोर्ड के कुछ अधिकारी कह रहे हैं कि सीएसी का काम मुख्य कोच चुनना था, लेकिन उन्होंने सलाहकार भी चुन लिए तो उन्हें यह जवाब देना चाहिए कि इस चयन के तुरंत बाद सीओए व बीसीसीआई ने सीएसी की तारीफ क्यों की थी? सीएसी पहले ही पत्र लिखकर इस बात का दुख जता चुकी है कि ऐसा दिखाया जा रहा है कि उन्होंने द्रविड़ और जहीर की नियुक्तियां मुख्य कोच शास्त्री पर थोपी थीं। सीएसी के पास इस बात के सुबूत भी हैं कि उन्होंने जहीर व द्रविड़ के चयन को लेकर शास्त्री से बात की थी जिस पर उन्होंने सहमति भी दी थी।

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